प्रमुख सचिव (पंचायतीराज) की ओर से प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को इस संबंध में शासनादेश भेजकर इसका कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं। शासनादेश में कहा गया है कि प्रदेश के कई विकास खंडों से शिकायतें मिल रही हैं कि ग्राम पंचायतों में विकास के लिए खुलने वाले ग्राम निधि के खातों के संचालन में बदलाव खंड विकास अधिकारी अपने स्तर से कर दे रहे हैं, जबकि पंचायतीराज अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार ग्राम निधि का विहित प्राधिकारी जिला पंचायतराज अधिकारी होता है और वही ग्राम निधि के खातों के संचालन में परिवर्तन कर सकता है।
इसी तरह विकास खंड स्तर पर सहायक विकास अधिकारी पंचायत के पद पर ग्राम विकास अधिकारी की तैनाती की जा रही है, जो गलत है। सहायक विकास अधिकारी पंचायत का पद पदोन्नति का पद है, जिस पर ग्राम पंचायत अधिकारी संवर्ग से ज्येष्ठता के आधार पर शत-प्रतिशत पदोन्नति की जाती है। ऐसे में सहायक विकास अधिकारी पंचायत पद की रिक्तियों की स्थिति में जनपद के वरिष्ठतम ग्राम पंचायत अधिकारी को ही प्रभार दिया जाए। किसी भी स्थिति में ग्राम विकास अधिकारी को एडीओ पंचायत का प्रभार न दिया जाए।
प्रमुख सचिव ने कहा है कि ग्राम पंचायत अधिकारियों व ग्राम विकास अधिकारियों के मध्य ग्राम पंचायतों का आवंटन जिला पंचायतराज अधिकारी के प्रस्ताव पर मुख्य विकास अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी की ओर से किया जाता है, जबकि कुछ जिलों में ऐसा नहीं किया जा रहा है, जो चिंताजनक है।
उन्होंने जिलाधिकारियों से कहा है कि ग्राम पंचायतों का आवंटन नियमानुसार उन्हीं के माध्यम से ही किया जाए।
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