नई दिल्ली, 31 दिसम्बर (आईएएनएस)। बिजली उपलब्धता बढ़ने, नवीकरणीय ऊर्जा पर अधिक ध्यान देने और तेल मूल्य में गिरावट से बीते वर्ष देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहतर रहा।
नई दिल्ली, 31 दिसम्बर (आईएएनएस)। बिजली उपलब्धता बढ़ने, नवीकरणीय ऊर्जा पर अधिक ध्यान देने और तेल मूल्य में गिरावट से बीते वर्ष देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहतर रहा।
बीते वर्ष हालांकि तेल एवं गैस ब्लॉक की नीलामी के लिए नई नीति की घोषणा नहीं हो पाई और न ही गहरे समुद्र में की जाने वाली नई खोजों के लिए प्राकृतिक गैस पर दिए जाने वाले प्रीमियम की घोषणा हुई।
सरकार ने हालांकि भविष्य हाइड्रोकार्बन ब्लॉकों की नीलामी के लिए उत्पादन साझेदारी मॉडल की जगह आय साझेदारी मॉडल अपना लिया।
नए फार्मूले के तहत घरेलू प्राकृतिक गैस का मूल्य 4.66 डॉलर प्रति यूनिट से 18 फीसदी घटाकर 3.82 डॉलर प्रति यूनिट कर दिया गया, जो एक अक्टूबर से छह महीने तक के लिए लागू रहेगा।
बीत वर्ष अंतर्राष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत में भारी गिरावट के कारण भारतीय बास्केट के तेल की कीमत 60 फीसदी से अधिक घटकर 35 डॉलर प्रति बैरल से नीचे चली गई, जो एक साल पहले 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर थी। इससे तेल आयात पर होने वाला खर्च घटा है, जिसका सकारात्मक असर देश के चालू खाता घाटा पर हुआ है।
बीते वर्ष देश में बिजली की किल्लत भी घटी है, जो 2011 की 8.5 फीसदी से घटकर अक्टूबर में 2.4 फीसदी रह गई, जबकि व्यस्त समय की किल्लत इस दौरान 10.6 फीसदी से घटकर 3.2 फीसदी रह गई।
साल के शुरू में सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य 2022 तक के लिए दोगुना कर 175 गीगावाट कर दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसा करते हुए कहा, “देश नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में मेगावाट से गीगावाट की तरफ बढ़ने जा रहा है।”
सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय जगत से यह भी वादा किया कि यदि विकसित देशों से कम कीमत पर उच्च प्रौद्योगिकी और कर्ज हासिल हुआ, तो देश 2030 तक देश के कुल ऊर्जा उत्पादन में गैर जीवाष्म ईंधन का हिस्सा बढ़ाकर 40 फीसदी तक पहुंचा दिया जाएगा।
बीते वर्ष की एक खास उपलब्धि यह भी रही कि 1,735 किलोमीटर लंबी तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-भारत (तापी) परियोजन का शिलान्यास हो गया, जिसके लिए लंबे समय से कोशिश की जा रही थी।
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