जातीय मधेशी आंदोलन और ईंधन की कमी के कारण ये मुश्किलें और भी बढ़ गईं।
नेपाल में आए इस खतरनाक भूकंप में करीब 9,000 लोगों की मौत हो गई और 23,000 से अधिक लोग घायल हुए। इस आपदा में कई अरब डॉलर की संपत्ति भी तबाह हो गई।
इस साल जुलाई में जहां नेपाल के नए संविधान का मसौदा तैयार हो रहा था, उस दौरान चार मधेशी पार्टियों ने असंतोष जताते हुए इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। उनके अनुसार, संविधान में उनके साथ भेदभाव किया गया।
नेपाल में सितम्बर में नए संविधान के सरकारी ऐलान के बाद भी मधेशी पार्टियों ने अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखते हुए इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
रिपोर्ट के अनुसार, चार महीनों तक तराई क्षेत्र में चले विरोध प्रदर्शन में 50 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें आठ पुलिसकर्मी भी शामिल थे।
इस बीच, सितम्बर में नेपाल को भारत से होने वाली आपूर्ति बंद हो गई, जिसके बाद नेपाल सरकार ने भारत पर आघोषित प्रतिबंध लगाने का आरोप लगाया। हालांकि भारत ने इसे खारिज किया।
नेपाल, भारत से ही अपनी सारी पेट्रोलियम संबंधी आपूर्ति करता है। इस प्रतिबंध के कारण केवल पेट्रोलियम ही नहीं, बल्कि दवाइयां और भूकंप से पीड़ित लोगों को राहत कार्य से संबंधित चीजों का आयात भी रुक गया।
हालांकि नए साल की शुरुआत से नेपाल को चीन से नई आशाओं का तोहफा भी मिला है।
नेपाल-चीन की वाणिज्य और उद्योग सभा के अध्यक्ष राजेश काजी श्रेष्ठा ने कहा, “2015 में भूकंप और ईंधन की समस्या के कारण हमारे व्यवसाय को काफी नुकसान हुआ, लेकिन नेपाल और चीन पहले से ही सात नए सीमा क्षेत्र खोलने के लिए तैयार हो गए हैं, इसलिए हमें आशा है कि व्यापार में विकास होगा।”
नवम्बर में नेपाल और चीन ने मुस्तांग, गोरखा, संखुवासभा, डोलखा, हुमला, मुगु और ताप्लेजुंग जिले में सात नए व्यापार क्षेत्र खोलने पर सहमति जताई थी। दोनों पक्षों ने पहले से बुनियादी ढांचों के पुनर्निर्माण के बाद प्रभावी ढंग से सीमा शुल्क कार्यालय संचालित करने का फैसला किया है।
इसी के साथ नेपाल ने चीनी पर्यटकों के लिए वीजा शुल्क में छूट देने की नई नीति की पहल की है। इससे देश को और अधिक चीनी पर्यटकों के आने की उम्मीद है।
नागरिक उड्डयन और पर्यटन मंत्रालय के मुताबिक, 2014 में चीन में 1.5 लाख चीनी पर्यटक आए थे।
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