न्यूयार्क, 6 जनवरी (आईएएनएस)। एक अध्ययन से पता चला है कि मतदाता किसी चुनाव में नास्तिक प्रत्याशियों के मुकाबले धर्म में आस्था रखने वाले प्रत्याशियों पर अधिक भरोसा करते हैं। इसमें पाया गया है कि धर्म के बारे में सीधे-सीधे या परोक्ष रूप से बात करने वाले प्रत्याशी के चुनाव जीतने की संभावना अधिक होती है।
अध्ययन करने वाले अमेरिका के ह्यूस्टन विश्विद्यालय के शोधार्थियों में शामिल स्काट क्लिफ्फोर्ड ने कहा, “उनकी (प्रत्याशियों की) धार्मिक पहचान अमेरिकी समाज में ईश्वर में विश्वास न करने वालों के मुकाबले एक शक्तिशाली, व्यापक लेकिन कई बार सूक्ष्म और अचेतन पूर्वाग्रह को दर्शाती है।”
शोधकर्ताओं ने अध्ययन के लिए राष्ट्रीय मतदान आंकड़ों की भी मदद ली है। इन्होंने मतदाताओं में नास्तिक प्रत्याशी के प्रति समर्थन, हिलेरी क्लिंटन की उम्मीदवारी के बारे में इस दृष्टि से समर्थन कि क्या वह धार्मिक हैं और धार्मिक प्रत्याशियों की विश्वसनीयता को अध्ययन की विषय वस्तु बनाया था।
अध्ययन में पाया गया कि इसमें शामिल एक-तिहाई प्रतिभागियों ने कहा कि नास्तिक सहज-सामान्य नहीं हो सकते।
क्लिफ्फोर्ड ने कहा, “हमने पाया कि धार्मिकता को प्रदर्शित न करना अमेरिका में सार्वजनिक पद को हासिल करने की राह में बड़ी बाधा है। और, नेता के धार्मिक होने की पहचान के साथ ही मतदाताओं में उसके प्रति विश्वास बढ़ जाता है।”
क्लिफ्फोर्ड ने कहा कि रिपब्लिकन नेता अपनी परंपरागत धार्मिक पहचान की नीति के साथ अपने मौजूदा जनसमर्थन को बरकरार रख सकते हैं। डेमोक्रेट अपनी धार्मिकता का प्रदर्शन कर उदारवादियों और परंपरावादियों के बीच अपनी पहुंच को बढ़ा सकते हैं।
अध्ययन के नतीजे अमेरिकन पोलिटिक्स रिसर्च जर्नल में प्रकाशित किए गए हैं।
dharmpath.com dharmpath