भवुनेश्वर, 10 जनवरी (आईएएनएस)। ओडिशा वन विभाग के वन्यजीव खंड ने रविवार को एशिया की सबसे बड़ी खारे पानी की झील और भारतीय उपमहाद्वीप में सर्दियों में प्रवासी पक्षियों के सबसे बड़े आश्रय स्थल चिल्का झील में पक्षियों की वार्षिक गिनती प्रक्रिया शुरू कर दी है।
वन विभाग के सूत्रों ने बताया कि राज्य के शोधकर्ता बुद्धिजीवी और पक्षी प्रेमी ‘बम्बई नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी’ (बीएनएसएस) और ‘चिल्का विकास प्राधिकरण’ (सीडीए) की मदद से पक्षियों की गिनती में हिस्सा ले रहे हैं।
सीडीए के कार्यकारी अध्यक्ष अजित कुमार पटनायक ने कहा, “पिछले 10 वर्षो से हम वैज्ञानिक तरीके से पक्षियों की गिनती कर रहे हैं। पक्षियों की गणना में हम यह भी पता लगा रहे हैं कि कितनी प्रजातियों के पक्षी यहां आ रहे हैं और उनके आने की प्रवृत्ति का भी पता लगा रहे हैं। कुछ पक्षी तापमान के प्रति बेहद संवेदनशील होते हैं और वे सर्दियों में देर होने या तापमान बढ़ने पर नहीं आते।”
एक अधिकारी के मुताबिक, चिल्का में अब तक प्रवासी पक्षियों के आने की संख्या सामान्य है, लेकिन तापमान बढ़ने और राज्य में बारिश कम होने के कारण इस साल कम पक्षियों के आने का अनुमान है।
चिल्का के अलावा कटक जिले में अथागढ़ उपखंड क्षेत्र के अंतर्गत 13 अन्य जगहों पर भी पक्षियों की गिनती की जा रही है।
सम्बलपुर जिले में हीराकुड जलाशय में पक्षियों की गणना शनिवार को की गई थी।
सूत्रों के मुताबिक, हीराकुंड जलाशय में इस वर्ष 95,000 से भी अधिक पक्षी आए, जबकि नौ नई प्रजातियों के पक्षियों को भी यहां देखा गया।
सूत्रों के मुताबिक, हर सर्दियों में कैस्पियन सागर, बाइकाल झील, रूस के दूर-दराज के इलाकों, मध्य और दक्षिण पूर्व एशिया, लद्दाख और हिमालय जैसे दूर दराज के स्थलों से प्रवासी पक्षी चिल्का आते हैं।
पिछले साल 7.61 लाख से भी अधिक प्रवासी पक्षी सर्दियों के दौरान चिल्का झील आए थे, जबकि 2013 में लगभग 7.19 लाख स्थानीय पक्षी और प्रवासी पक्षी 1,100 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाली इस खारे पानी की झील में आए थे।
dharmpath.com dharmpath