मामला 15 अगस्त, 2015 का है, जब लावा मोड़ पर बिजली, पानी, सड़क के मांग को लेकर छात्र नेता विवेकानंद पांडेय के नेतृत्व में आमरण अनशन कर रहे आंदोलनकारियों को पुलिस की बर्बरता का सामना करना पड़ा था।
इस मामले में पुलिस ने छात्र नेता विवेकानंद पांडेय और स्वामी सहजानंद पीजी कालेज के प्रो. ओमप्रकाश सिंह सहित 69 नामजद व 900 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मौके से गिरफ्तार कर बेरहमी से पीटा गया और फिर संगीन धाराओं में आरोपी बनाकर जेल भेज दिया।
इसके बाद पुलिस ने 69 नामजद आरोपियों में से 22 को बरी कर दिया, जबकि 47 आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल कर दिया। मामला यहीं तक नहीं खत्म हुआ। बाद में पुलिस ने आरोपियों को गैंगस्टर व गुंडा एक्ट में भी निरुद्ध कर दिया।
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