आईएमए ने की ग्रीन मैडिसन की सिफारिश

नई दिल्ली, 15 जनवरी (आईएएनएस)। पौधे हानिकारक कार्बन डाइआक्साइड खींच लेते हैं और जीव-जंतुओं का जीवन चलाने के लिए ऑक्सीजन देते हैं। प्रदूषण को कम करने के लिए किए जाने वाले हर प्रयास के साथ पौधरोपण की जरूरत से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने दफ्तरों को भी पौधों से हरा-भरा रखने पर जोर दिया है।

आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. एसएस अग्रवाल और ऑनरेरी सेक्रेटरी जनरल डॉ. के.के. अग्रवाल कहते हैं कि मौसम बदलाव, रिन्यूवेबल एनर्जी, सॉलिड वेस्ट रिसाइक्लिंग, बिजली और पानी की बचत, इंनडोर केमिकल प्रयोग, यातायात विकल्प, ऑर्गेनिगक फूड और लैंडस्केप मैनेजमेंट के बारे में आईएमए ने 140 सूत्र सुझाए हैं।

इनमें घरों और व्यपारिक संस्थानों पर बिजली की बचत, रीसाईकल हो सकने वाले बर्तनों का प्रयोग, कीटनाशक मुक्त प्राकृतिक आहार खाना आदि प्रमुख सूत्र शामिल हैं।

इसके साथ ही नेशनल एक्रीडेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिट्ल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स इन इंडिया और ज्वाइंट कमिशन इंटरनेशनल ने कहा है कि दुनिया भर के लिए जारी किए गए बायोमेडिकल वेस्ट के प्रबंधन के नियमों का पालन होना चाहिए।

डब्लयूएमए की सहयोगी संस्था माई ग्रीन डॉक्टर डॉक्टरों में हरित चिंतन पैदा करने के लिए सहयोग देता है। माइ ग्रीन डॉक्टर एक मुफ्त सेवा है जो डॉक्टरों को ओपीडी, डायग्निटिक सेंटरों और को अधिक ग्रीन बनाने में मदद करता है, जिससे उनके धन की भी बचत होती है। इसकी शुरुआत अमेरिका से हुई है, लेकिन यह पूरी दुनिया पर लागू होता है। पर्यावरण की हानि से मरीज और डॉक्टर दोनों को ही नुकसान पहुंचता है।

इसके साथ ही उनके द्वारा इलाज, जांच और मरीज की निगरानी के लिए प्रयोग की जाती मशीनरी ग्रामीण और शहरी बिजली घरों पर दबाव भी डालती है। इसलिए डॉक्टरों की भी जिम्मेदारी है कि वह समाज को पर्यावरण के संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों को अपनाने के लिए शिक्षित करना और ऐसी नीतियों को अपने संस्थानों में लागू करें।

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