नई दिल्ली, 20 जनवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को 5,000 मेगावाट से अधिक क्षमता की ग्रिड से जुड़ी सौर फोटोवोल्टेइक (पीवी) बिहली परियोजनाओं की स्थापना को मंजूरी दे दी। इस पर करीब 30 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक के बाद बिजली और नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने संवाददाताओं से कहा कि व्यवहार्यता गैप फंडिंग (वीजीएफ) के जरिए सौर बिजली को बढ़ावा देने का फैसला मोदी के देश को दुनिया का सबसे बड़ा सौर बिजली उत्पादक बनाने के वादे के अनुरूप है।
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है, “5,000 मेगावाट के सौर पीवी संयंत्र की स्थापना से सालाना करीब 830 करोड़ यूनिट बिजली पैदा होगी, जिससे करीब 25 लाख घरों की जरूरत पूरी होगी।”
बयान में यह भी कहा गया है कि 5,000 मेगावाट की इस परियोजना के लिए वीजीएफ देने के लिए 5,050 करोड़ रुपये के कोष की जरूरत होने का अनुमान है।
इसमें भारतीय सौर ऊर्जा निगम (एससीआई) के कुल अनुदान निपटान की एक प्रतिशत की दर से रखरखाव प्रभार और वीजीएफ योजनाओं के लिए सुरक्षा प्रणाली के भुगतान की 500 करोड़ रुपए की राशि भी शामिल है।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने 2022 तक ग्रिड से जुड़ी एक लाख मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा है।
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