इकनॉमिक इनफोर्मेशन डेली की रिपोर्ट के मुताबिक, इन कदमों के तहत नई कोयला खनन परियोजनाओं को स्थगित करना, पुरानी खदानों को बंद करना, कर्ज में डूबी कंपनी को बंद करने का निर्देश देना और कोयला-बिजली एकीकरण परियोजनाओं में तेजी लाना शामिल है।
चीन अगले तीन साल में 4,300 कोयला खानों को बंद करना चाहता है, 70 करोड़ टन उत्पादन आधिक्य घटाना चाहता है और 10 लाख कर्मचारियों को दूसरे क्षेत्रों में स्थानांतरित करना चाहता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कर्मचारियों के स्थानांतरण की योजना के लिए केंद्र सरकार ने 30 अरब युआन (4.57 अरब डॉलर) का खर्च निर्धारित किया है।
चाइना नेशनल कोल एसोसिएशन के उप प्रमुख जियांग झिमिन ने कहा कि आर्थिक सुस्ती, पुनर्गठन और पर्यावरण संरक्षण के कारण मांग घट रही है और घरेलू कोयला मांग 2014 में साल-दर-साल आधार पर 2.9 फीसदी कम रही थी। इसके 2015 में चार फीसदी कम रहने की उम्मीद है।
एसोसिएशन के सांख्यिकी और सूचना प्रमुख चेन यांगकाई के मुताबिक, गत पांच साल में चीन ने करीब 56 करोड़ टन कोयला उत्पादन क्षमता घटाई है और 7,250 कोयला खानों को बंद किया है।
2015 के अंत तक चीन में करीब 11 हजार कोयला खानें थीं, जिनकी कुल क्षमता 5.7 अरब टन थी।
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