नई दिल्ली, 25 जनवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सोमवार को कहा कि आज भारत एक उदीयमान शक्ति है, एक ऐसा देश, जो विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवोन्मेषण और स्टार्ट-अप में तेजी से उभर रहा है और इसकी आर्थिक सफलता विश्व के लिए एक कौतूहल बन गई है।
राष्ट्रपति ने 67वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा, “वर्ष 2015 चुनौतियों का वर्ष रहा है। इस दौरान विश्व अर्थव्यवस्था में मंदी रही। वस्तु बाजारों पर असमंजस छाया रहा। संस्थागत कार्रवाई में अनिश्चितता आई। ऐसे कठिन माहौल में किसी भी राष्ट्र के लिए तरक्की करना आसान नहीं हो सकता। भारतीय अर्थव्यवस्था को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। निवेशकों की आशंका के कारण भारत समेत अन्य उभरते बाजारों से धन वापस लिया जाने लगा, जिससे भारतीय रुपये पर दबाव पड़ा। हमारा निर्यात प्रभावित हुआ। हमारे विनिर्माण क्षेत्र का अभी पूरी तरह उबरना बाकी है।”
उन्होंने कहा कि “2015 में हम प्रकृति की कृपा से भी वंचित रहे। भारत के अधिकतर हिस्सों में भीषण सूखा पड़ा, जबकि अन्य हिस्से विनाशकारी बाढ़ की चपेट में आ गए। मौसम के असामान्य हालात ने हमारे कृषि उत्पादन को प्रभावित किया। ग्रामीण रोजगार और आमदनी पर बुरा असर पड़ा।”
राष्ट्रपति ने कहा, “हम इन्हें चुनौतियां कह सकते हैं, क्योंकि हम इनसे अवगत हैं। समस्या की पहचान करना और इसके समाधान पर ध्यान देना एक श्रेष्ठ गुण है। भारत इन समस्याओं को हल करने के लिए कार्यनीतियां बना रहा है और उनका कार्यान्वयन कर रहा है।”
उन्होंने कहा, “हमारे लोकतंत्र ने जो हासिल किया है, हमें उसकी भी सराहना करनी चाहिए। बुनियादी ढांचे, विनिर्माण, स्वास्थ्य, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में निवेश से, हम अधिक विकास दर प्राप्त करने की बेहतर स्थिति में हैं, जिससे हमें अगले 10-15 वर्षो में गरीबी मिटाने में मदद मिलेगी।”
प्रणब ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर देश-विदेश में बसे सभी लोगों के साथ ही सशस्त्र सेनाओं, अर्ध-सैनिक बलों तथा आंतरिक सुरक्षा बल के सदस्यों को भी बधाई दी। उन्होंने वीर सैनिकों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने भारत की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने और विधि शासन को कायम रखने के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया है।
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