नई दिल्ली, 31 जनवरी (आईएएनएस)। आस्ट्रेलिया के दिग्गज हॉकी खिलाड़ी जे स्टाकी का मानना है कि भारत जैसी मध्यम स्तरीय टीमों को ओलंपिक के बदले प्रारूप से काफी फायदा होगा।
नई दिल्ली, 31 जनवरी (आईएएनएस)। आस्ट्रेलिया के दिग्गज हॉकी खिलाड़ी जे स्टाकी का मानना है कि भारत जैसी मध्यम स्तरीय टीमों को ओलंपिक के बदले प्रारूप से काफी फायदा होगा।
रियो ओलंपिक-2016 में हॉकी के खेल में नए प्रारूप को शामिल किया गया है, जिसके तहत दो समूहों से शीर्ष चार टीमें सीधे तौर पर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश करेंगी।
1984 मॉस्को ओलम्पिक खेलों से ही ओलंपिक में 12 टीमों को दो समूहों में विभाजित किया गया था, जिसमें प्रत्येक समूह में शामिल छह टीमों में से शीर्ष दो-दो टीमें सीधे तौर पर सेमीफाइनल में प्रवेश करेंगी और अन्य टीमें पदक की दौड़ से बाहर हो जाएंगी।
इस प्रारूप से उठे प्रश्नों को ध्यान में रखते हुए प्रतियोगिता के नियमो में कुछ बदलाव किए गए। जिसके तहत टीमें सेमीफाइनल में प्रवेश से पहले अतिरिक्त मैच खेलेंगी। दोनो समूहों (पूल-ए, पूल-बी) में शीर्ष पर काबिज चार टीमें क्वार्टर फाइनल दौर में खेलेंगी।
माना जा रहा है कि इस प्रारूप से बेल्जियम, भारत, दक्षिण कोरिया जैसी मध्यम स्तरीय टीमों को अतिरिक्त अवसर मिलेगा।
ब्राजील में पांच से 21 अगस्त तक होने वाले रियो ओलंपिक खेलों में भारत को नीदरलैंड्स, दो बार की विजेता जर्मनी, अर्जेटीना, आयरलैंड और कनाडा के साथ ‘पूल-बी’ समूह में रखा गया है। वहीं, ‘पूल-ए’ समूह में आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, बेल्जियम, न्यूजीलैंड, स्पेन और मेजबान ब्राजील शामिल है।
हॉकी इंडिया लीग (एचआईएल) की टीम दबंग मुंबई के कोच स्टेकी ने आईएएनएस को बताया, “ओलंपिक के इस संस्करण में क्वार्टर फाइनल भी शामिल होगा। यह भारत सहित कई मध्यमस्तरीय टीमों के लिए काफी दिलचस्प बात है। उन्हें इससे फायदा हो सकता है और यह उच्च स्तरीय टीमों के लिए मुश्किल हो सकता है।”
जेमी डॉयर से पहले काफी समय तक आस्ट्रेलिया के सबसे अधिक मैच खेलने वाले खिलाड़ी रहे स्टेकी को लगता है कि भारत के हाल के अच्छे प्रदर्शन का श्रेय एचआईएल को जाता है।
भारत ने हॉकी विश्व लीग (एचडब्ल्यूएल) के फाइनल में पिछले महीने रजत पदक जीता था।
1992 में ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले स्टेकी ने कहा, “पिछले कुछ साल में भारत ने काफी सुधार किया है और मुझे लगता है कि यह काफी कुछ एचआईएल के कारण हुआ है।”
उन्होंने कहा, “जितने मुकाबले आप खेलते हैं, टीम के प्रदर्शन में भी उतना सुधार होता है। इससे खिलाड़ियों को विभिन्न खेल शैलियों को खेलना का अवसर मिलता है।”
स्टेकी का मानना है कि भले ही यूरोपीय टीम का हाल ही का प्रदर्शन खराब रहा हो, लेकिन वह रियो में कड़ी चुनौती दे सकती है।
1999 में साल के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का खिताब जीतने वाले स्टेकी ने नीदरलैंड्स के कप्तान रॉबर्ट वैन डर होर्स्ट की तारीफ की, जिन्हें 2015 के ‘प्लेयर ऑफ दि ईयर’ के पुरस्कार से नवाजा गया है।
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