स्पैस्टिसिटी से पीड़ित ओमान की बच्ची का फोर्टिस में सफल उपचार

नोएडा/नई दिल्ली, 1 फरवरी (आईएएनएस)। ओमान से आई आठ वर्षीय बच्ची अल जहरा जाहरान जहीर लगभग तीन महीने पहले तक बिना सहारे के बिस्तर से उठ भी नहीं पातीं थीं और न ही वह सीधे खड़े होने या चलने में समर्थ थी। उसे जोड़ों और पेट में असहनीय दर्द रहता था, जिसके कारण उसकी जिंदगी अपने हम उम्र सामान्य बच्चों जैसी नहीं थी।

नोएडा/नई दिल्ली, 1 फरवरी (आईएएनएस)। ओमान से आई आठ वर्षीय बच्ची अल जहरा जाहरान जहीर लगभग तीन महीने पहले तक बिना सहारे के बिस्तर से उठ भी नहीं पातीं थीं और न ही वह सीधे खड़े होने या चलने में समर्थ थी। उसे जोड़ों और पेट में असहनीय दर्द रहता था, जिसके कारण उसकी जिंदगी अपने हम उम्र सामान्य बच्चों जैसी नहीं थी।

क्लिनिकल परीक्षण में पता चला कि जहीर ‘स्पैस्टिक सेरेब्रल पाल्सी’ यानी सेरेब्रल पाल्सी के साथ गंभीर स्पैस्टिसिटी (मांसपेशियों की अकड़न) से पीड़ित थीं।

नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में वरिष्ठ कंसल्टेंट न्यूरो-सर्जन डॉ. राहुल गुप्ता के नेतृत्व में सर्जिकल टीम ने जहरा का ईलाज किया और उसकी समस्या अब लगभग 70 प्रतिशत ठीक हो चुकी है ।

भारत आने से पहले उसका लंबा चिकित्सकीय उपचार चला। दवाओं, पैरों की सर्जरी और अन्य प्रक्रियाओं को झेलने के बाद भी उसकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ था।

पहले किए गए चिकित्सकीय उपचार के कई दुष्प्रभाव थे और अब स्पाइनल फ्लूइड में स्थित नसों के आस-पास दवाओं की छोटी डोज के जरिए सीधे दवा पहुंचाना ही उपचार का एकमात्र विकल्प बचा था।

इसके लिए स्पाइनल फ्लूइड में निरंतर मांस-पेशियों को आराम पहुंचाने वाली दवा (मौखिक डोज से लगभग सौ गुणा कम) के प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए इंटराथिकल बैकलोफेन इन्फ्यूजन पंप्स फिट किया गया। इस उपचार से उसकी स्थिति में काफी सुधार हुआ और उसकी मांस-पेशियों का खिंचाव कम हुआ, जिसके परिणामस्वरूप वह बिना किसी दर्द के बैठने और अपने अंगों को हिलाने में सक्षम हो गईं।

उपचार को पूर्ण प्रभावशाली बनाने के लिए फिजियोथेरेपी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र सिंह की खास देखरेख में जाहिरा की पीडिएट्रिक फिजियोथेरेपी की गई जिसमें हाइड्रोथेरेपी (पानी के साथ व्यायाम) के साथ विभिन्न तरह के मांस-पेशियों को आराम देने वाली और पोस्चरल नियंत्रण न्यूरो फिजियोथेरेपी कराई गई।

डॉ. राहुल गुप्ता ने कहा, “स्पैस्टिक सेरेब्रल पॉल्सी सेरेब्रल पॉल्सी का बेहद सामान्य प्रकार है, जो 75 से 80 फीसदी मरीजों में देखा जाता है। इस बीमारी से पीड़ित मरीज अपनी मांस-पेशियों को रिलैक्स करने में असमर्थ होते हैं और अगर इन्हें जबर्दस्ती खींचा जाता है तो मांसपेशियां और भी सख्त हो जाती हैं। इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति की मांसपेशियों की सामान्य क्रिया भी बाधित हो जाती है।”

फोर्टिस अस्पताल, नोएडा के क्षेत्रीय निदेशक गगन सहगल ने कहा, “हमारे विशेषज्ञों ने बीमारी को दूर करने के लिए विशेष और सटीक उपचार मुहैया कराया। बेबी अल जाहरा का जीवन अब काफी बेहतर हो गया है और हमें उम्मीद है कि वह छह माह से एक साल के अंदर बिना किसी सहारे के खुद खड़े होने और चलने में समर्थ हो जाएंगी।”

उपचार के बाद अब अलजाहरा बिना किसी सहारे के बैठने, वॉकर की मदद से चलने और पकड़ने के लिए हाथों का इस्तेमाल कर सकती है। वह अपनी समस्या में हुए सुधार के बाद बेहद खुश है और अपने पैरों पर खड़े होकर अपनी बहन के साथ खेल सकती है।

बाल रोग विशेषज्ञों और न्यूरोसर्जन्स के मुताबिक सेरेब्रल पॉल्सी (सीपी) एक सामान्य न्यूरो डेवलपमेंटल स्थिति है। इसके कई कारक हैं और इसके बारे में जागरूकता बेहद महत्वपूर्ण है। सेरेब्रल पॉल्सी के कारण मंदबुद्धि, बोलने, भाषा और गतिशीलता की समस्याओं जैसी कई खामियां हो सकती हैं।

इस रोग से पीड़ित बच्चों की समस्या का पता लगाने के लिए संपूर्ण न्यूरो डेवलपमेंटल मूल्यांकन करना चाहिए ताकि उसके हिसाब से समग्र शुरुआती उपचार कार्यक्रम को सफलता पूर्वक लागू किया जा सके। उन्नत न्यूरो सर्जरी, न्यूरोलॉजी और फिजियोथेरेपी उपचार स्पैस्टिक सेरेब्रल पॉल्सी की अक्षमता को काफी हद तक कम करते हैं और मरीज के दैनिक गतिविधियों में सुधार कर उन्हें ज्यादा आत्मनिर्भर बनाते हैं।

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