ग्रेटर नोएडा, 6 फरवरी (आईएएनएस)। भारत में डीजल कारों की निर्माता कम्पनियां राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में 2000 सीसी से अधिक शक्तिशाली इंजनों से युक्त गाड़ियों के पंजीकरण पर लगे प्रतिबंध से अपने स्तर पर निपट रही हैं। ऐसी सभी अग्रणी कम्पनियां दूसरे रास्ते अपनाते हुए इस समस्या से निपटने के लिए तैयार हैं।
ग्रेटर नोएडा, 6 फरवरी (आईएएनएस)। भारत में डीजल कारों की निर्माता कम्पनियां राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में 2000 सीसी से अधिक शक्तिशाली इंजनों से युक्त गाड़ियों के पंजीकरण पर लगे प्रतिबंध से अपने स्तर पर निपट रही हैं। ऐसी सभी अग्रणी कम्पनियां दूसरे रास्ते अपनाते हुए इस समस्या से निपटने के लिए तैयार हैं।
नई दिल्ली में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर को कम करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने 16 दिसम्बर, 2015 को सरकार को 2000 सीसी से अधिक शक्ति वाले इंजनों से लैस कारों के पंजीकरण पर 31 मार्च, 2006 तक प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया था।
इस प्रतिबंध से मुख्य तौर पर स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल (एसयूवी) और मल्टी यूटिलिटी व्हीकल (एमयूवी) की बिक्री पर बुरा असर पड़ा था। ऐसे में कार निर्माता कम्पनियों ने ऐसी सभी गाड़ियों के इंजनों की शक्ति को मामूली स्तर पर कम करते हुए इस प्रतिबंध से निपटने का मन बनाया था।
इसी क्रम में महेंद्रा ने हाल ही में अपनी एक एसयूवी बाजार में उतारी, जिसके इंजन की शक्ति पहले 2000 सीसी थी लेकिन अब वह 1999.9 सीसी शक्ति के इंजन के साथ बाजार में उपलब्ध है।
सरकार द्वारा लगाए गए इस प्रतिबंध से टोयोटा को काफी नुकसान हुआ। टोयोटा किर्लोस्कर मोटर इंडिया के निदेशक (विपणन) एन. राजा ने आईएएनएस को बताया, “साफ तौर पर इस प्रतिबंध ने पहले क्वार्टर में इनोवा और फाच्र्यनर की बिक्री पर असर डाला। एनसीआर में हमारी कुल बिक्री का 8 से 10 फीसदी बिक्री होती है। डीलरों के लिए एनसीआर में मुनाफे का प्रतिशत 50 से 60 फीसदी तक पहुंच सकता है।”
टोयोटा का लैंड क्रूजर भी इसी स्तर की एसयूवी है और जिसके इंजन की शक्ति 2000 सीसी से अधिक है लेकिन भारत में इसकी बिक्री अधिक नहीं है।
राजा ने कहा, “प्लान-बी के तहत हम इन सभी गाड़ियों का पेट्रोल वेरिएंट बाजार में उतारने के बारे में सोच रहे हैं। हमारे पास इंजन हैं लेकिन अब तक हमने इन्हें बाजार में उतारने का समय नहीं निर्धारित किया है। यह साल के मध्य में हो सकता है।”
राजा ने कहा कि एक और रास्ता हो सकता है और वह इंजन शक्ति को 2000 सीसी से कम करने का है।
जानकारों का कहना है कि भारत में प्रतिवर्ष 30 लाख कारों की बिक्री होती है और इसका सात फीसदी हिस्सा एनसीआर में होता है। एक अनुमान के मुताबिक एनसीआर में हर साल 210,000 कारें बिकती हैं।
इनमें से डीजल गाड़ियों का प्रतिशत 25 है। इसे संख्या के आधार पर 52,500 के रूप में देखा जा सकता है। यह भारत में बिकने वाली कारों में डीजल कारों की कुल संख्या का 1.75 प्रतिशत है।
ग्रेटर नोएडा में जारी ऑटो एक्सपो में एसयूवी और एमयूवी सेगमेंट में कई नई गाड़ियों लांच की गई हैं। इनमें इनोवा क्राइस्टा भी शामिल है, जो 2016 के मध्य में बिकनी शुरू हो जाएगी।
इसी तरह अमेरिका की मशहूर एसयूवी निर्माता कम्पनी-जीप ने भी साफ किया है कि उसके पास भी इस सरकारी प्रतिबंध से निपटने के लिए कई रास्ते हैं।
इटली की कम्पनी फिएट के पास जीप का मालिकाना हक है और कम्पनी के एक सीनियर अधिकारी ने आईएएनएस से कहा कि अब कम्पनी भारत में जीप को पेट्रोल इंजन के साथ उतारने के बारे में गम्भीरता से सोच रही है।
अधिकारी ने कहा, “हम भारत में आइकोनिक जीप को पेट्रोल इंजन में उतारने के बारे में सोच रहे हैं। जीप के पास इतनी जगह है कि वह इस तरह के प्रतिबंधों को पार कर सकती है। हम जीप के 3.6 लीटर पेट्रोल इंजन के बारे में सोच रहे हैं।”
जीप ने ऑटो एक्सपो में तीन एसयूवी लांच किए हैं, जिनमें रेंगलर भी शामिल है। कम्पनी इस साल कारों के क्षेत्र में भी उतारने का मन बना रही है।
सूत्र ने कहा, “प्रतिबंध दिल्ली में हो या फिर भारत के दूसरे शहरों में, हम इससे निपटने के लिए तैयार हैं।”
वैश्विक उत्सर्जन कांड में फंसी जर्मन कार निर्माता कम्पनी-वोग्सवैगन ने भी इसी तरह की बात कही।
भारत में कम्पनी के प्रमुख सिरीष विस्सा ने आईएएनएस से कहा, “हमारे पास तकनीक है, इंजनों की शक्ति के आधार पर अलग-अलग मॉडल और वेरिएंट हैं। हम मानते हैं कि 2000 सीसी की कारें किसी के लिए सबसे अच्छी होती हैं और इस लिहाज से हम बेजोड़ हैं। ऐसे में बाजार में चाहें कुछ भी हो जाए, हमारे पास इतनी गहराई और विकल्प हैं कि हम हर समस्या से आसानी से निपट सकते हैं।”
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