म्यूनिख सुरक्षा परिषद (एमएससी) में एक भाषण में मेदवेदेव ने कहा, “लगभग हर दिन हम सबसे भयानक खतरों में से एक नाटो या संपूर्ण यूरोप या अमेरिका से जूझते हैं।”
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “हम नए शीत युद्ध की तरफ बढ़ रहे हैं। कभी-कभी मुझे आश्चर्य होता है कि हम साल 2016 में जी रहे हैं या सन् 1962 में।”
सीरिया संघर्ष व यूक्रेन पर विभिन्न मत रूस तथा पश्चिम के बीच के संबंधों के महत्व को कम करता है। दोनों पक्ष एक दूसरे के खिलाफ दुश्मनी भरा रवैया अपनाते हैं।
मेदवेदेव ने आलोचना करते हुए कहा कि नाटो की पूर्वी यूरोप को लेकर जो नीति है, वह रूस के प्रतिकूल है। आतंकवाद व क्षेत्रीय संघर्षो से निपटने के दौरान एक दूसरे से दुश्मनी निभाने के बजाय सहयोग बरतने की आवश्यकता है।
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