तिरुवनंतपुरम, 24 फरवरी (आईएएनएस)। केरल विधानसभा में बुधवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच झड़प देखने को मिली। मुख्यमंत्री ओमन चांडी की मौजूदगी में दोनों पक्षों ने 1999 के पाम तेल आयात मामले को लेकर एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी की।
तिरुवनंतपुरम, 24 फरवरी (आईएएनएस)। केरल विधानसभा में बुधवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच झड़प देखने को मिली। मुख्यमंत्री ओमन चांडी की मौजूदगी में दोनों पक्षों ने 1999 के पाम तेल आयात मामले को लेकर एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी की।
विपक्षी वामदलों ने इस मामले को विधानसभा सत्र के आखिर से एक दिन पहले उठाया।
1992 में मुख्यमंत्री के. करुणाकरण के शासनकाल में 15,000 टन पाम तेल का आयात किया गथा। इसमें 1999 में कम्युनिस्टों के नेतृत्ववाली ई. के. नयनार सरकार ने सरकारी खजाने को 2.32 करोड़ रुपये का नुकसान का मामला दर्ज कराया।
त्रिशूर की सतर्कता अदालत ने मंगलवार को दो सेवानिवृत्त अफसरों की इस मामले से अलग रखने की याचिका को मंजूर कर लिया और मामले से मुक्त कर दिया।
न्यायाधीश एस. एस. वासन ने तत्कालीन वित्त मंत्री ओमन चांडी का उल्लेख करते हुए कहा कि पाम तेल के आयात से जुड़ी फाइलों की सारी जानकारी उन्हें थी। इस बयान ने विपक्षी वाम दलों को बुधवार में सत्ता पक्ष पर वार करने का नया हथियार दे दिया।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के विधायक राजू अब्राहम ने कहा कि जब यह मामला उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के सामने ले जाया गया था तो अदालतों ने कहा था कि इस मामले में 23वें गवाह चांडी के खिलाफ कुछ नया सामने आता है तो यह मामला दोबारा उनके सामने लाया जाए।
उन्होंने विधानसभा में कहा कि सर्तकता अदालत के न्यायाधीश द्वारा मंगलवार को की गई टिप्पणी ‘बिल्कुल साफ’ है।
वहीं, गृह मंत्री रमेश चेन्नीथाला ने कहा कि किसी को भी न्यायालय के फैसले और टिप्पणी में अंतर समझना चाहिए।
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