मुख्यमंत्री के निर्देश पर दीवान का पार्थिव शरीर विशेष विमान द्वारा नई दिल्ली से रायपुर लाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा है कि दीवान की अंत्येष्टि संपूर्ण राजकीय सम्मान के साथ की जाएगी।
डॉ. रमन सिंह ने बुधवार को राजधानी रायपुर में जारी शोक संदेश में कहा कि पवन दीवान के निधन से छत्तीसगढ़ के साहित्य और आध्यात्मिक आकाश के एक चमकदार सितारे का अचानक अवसान हम सबके लिए अत्यंत हृृदयविदारक है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “दिवंगत दीवान ने छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण आंदोलन के लिए जनचेतना जागृत करने में अपना ऐतिहासिक योगदान दिया। उन्होंने अपनी हिंदी और छत्तीसगढ़ी कविताओं के माध्यम से जहां मानवीय संवेदनाओं को लगातार अपनी हृदय स्पर्शी अभिव्यक्ति दी, वहीं राज्य निर्माण के लिए जन-जागरण में भी उनकी कविताओं ने उत्प्रेरक का कार्य किया।”
उन्होंने कहा कि पवन दीवान ने रामायण और भागवत प्रवचन के माध्यम से छत्तीसगढ़ के गांव-गांव में भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के प्रचार-प्रसार में ऐतिहासिक योगदान दिया।
डॉ. सिंह ने कहा, “वर्ष 1977-78 में तत्कालीन अविभाजित मध्यप्रदेश की विधानसभा में राजिम से विधायक निर्वाचित दीवान ने जेल मंत्री के रूप में भी उल्लेखनीय कार्य किया। लोकसभा क्षेत्र के सांसद के रूप में और छत्तीसगढ़ राज्य गौ-सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में भी जनता को अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दी।”
मुख्यमंत्री ने दीवान के शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना और सहानुभूति प्रकट करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है।
पवन दीवान का जन्म एक जनवरी 1945 को राजिम के पास ग्राम किरवई में हुआ था। उनके पिता सुखरामधर दीवान शिक्षक थे।
पवन दीवान ने राजधानी रायपुर के शासकीय संस्कृत महाविद्यालय से संस्कृत साहित्य में एम.ए. किया था। उन्होंने हिन्दी में भी स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की थी। वह संस्कृत, हिन्दी और छत्तीसगढ़ी भाषाओं के प्रकांड विद्वान थे।
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