अंकारा, 5 मार्च (आईएएनएस)। तुर्की की पुलिस ने देश के सबसे बड़े अखबार ‘जमान’ के कार्यालय पर छापा मारा। इससे कुछ ही घंटे पहले अदालत ने इसे राज्य के नियंत्रण में रखने का फैसला सुनाया था।
‘बीबीसी’ की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने शुक्रवार देर शाम बिल्डिंग में प्रवेश किया और बाहर जमा प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े।
‘जमान’ हिज्मत आंदोलन से जुड़ा रहा है, जो अमेरिका में रहने वाले मौलवी फतुल्ला गुलेन से संबद्ध है। तुर्की का कहना है कि हिज्मत एक आतंकवादी संगठन है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रपति रेसेप तईप एडरेगन की सरकार को उखाड़ फेंकना है।
समाचार-पत्र के खिलाफ की गई इस छापेमारी के दौरान हिज्मत के कई समर्थकों को गिरफ्तार किया गया। गुलेन और एडरेगन कभी एक-दूसरे के साथ थे, लेकिन बाद में अलग हो गए।
तुंर्की की सरकार को पत्रकारों के खिलाफ की गई इस कार्रवाई के लिए अंतर्राष्ट्रीय आलोचना झेलनी पड़ रही है।
अदालत ने शुक्रवार को दिए आदेश में कहा था कि ‘जमान’ का संचालन अब प्रशासन द्वारा किया जाएगा।
आदेश में कोई अन्य विस्तृत जानकारी नहीं दी गई। इस समाचार-पत्र की प्रसार संख्या करीब 6,50,000 है।
बाद में ‘जमान’ के सैकड़ों समर्थक समाचार-पत्र के दफ्तर के बाहर खड़े हो गए और उन्होंने इसके सरकारी अधिग्रहण का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों के हाथों में मौजूद एक तख्ती पर लिखा था, ‘हम स्वतंत्र प्रेस लेकर रहेंगे।’
इस छापेमारी से कुछ ही देर पहले ‘जमान’ के मुख्य संपादक अब्दुलहामित बिलिसी ने कहा, “मुझे यकीन है कि मीडिया आजाद रहेगा, भले ही हमें दीवारों पर ही क्यों ना लिखना पड़े। मैं नहीं समझता कि डिजिटल युग में मीडिया का मुंह बंद करना संभव है।”
उन्होंने ये बातें सिहान न्यूज एजेंसी से कही, जो खुद अदालत के आदेश से प्रभावित है।
जामान के एक पत्रकार एम्रे सोनकान ने ट्विटर पर लिखा, “तुर्की की सरकार ने देश की एक आलोचनात्मक आवाजों में से एक आखिरी ‘जमान दैनिक’ को जब्त कर लिया है..लोकतंत्र का अंत हो गया।”
उनके सहयोगी अब्दुल्ला आयासुन ने ट्वीट किया, “जमान कार्यालय के अंदर दंगारोधी पुलिस का जमावड़ा। उन्होंने मुझे बाहर निकाल दिया।”
इस समाचार-पत्र की वेबसाइट चालू है, लेकिन शनिवार से इसे अपडेट नहीं किया गया है।
वहीं, अमेरिकी सरकार ने इस घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह तुर्की सरकार द्वारा न्याय व कानून प्रवर्तन इकाइयों के इस्तेमाल को दर्शाता है।
‘जमान’ के बारे में फैसला आने से पहले तुर्की की संवैधानिक अदालत ने हिरासत में रखे तुर्की के दो पत्रकारों को रिहा करने का आदेश दिया था, जिन पर देश के रहस्यों को उजागर करने का आरोप था।
हिज्मत आंदोलन से संबंध के आरोप में पिछले साल दो अन्य समाचार-पत्रों तथा दो टेलीविजन चैनलों को भी प्रशासन के अधीन कर दिया गया था।
विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2015 में तुर्की 180 देशों में 149वें स्थान पर है। हालांकि वहां की सरकार का दावा है कि दुनिया के सबसे अधिक प्रेस की आजादी वाले देशों में तुर्की भी है।
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