उसने कहा कि इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान से कोई भी प्रतिनिधि इस शांति वार्ता में शामिल नहीं होगा।
इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान देश में सत्ता से बेदखल तालिबान का नाम है।
इस संबंध में शनिवार को जारी बयान में कहा गया है, “इस वार्ता में शामिल होने के लिए न तो इस्लामिक अमीरात के नेता मुल्ला अख्तर मुहम्मद मंसूर ने किसी को इसमें शामिल होने के लिए अधिकृत किया है और न ही इस्लामिक अमीरात नेतृत्व परिषद ने इस बारे में कोई निर्णय लिया है।”
उल्लेखनीय है कि चार देशों- अफगानिस्तान, पाकिस्तान, अमेरिका और चीन ने काबुल में हाल ही में चौथी दौर की वार्ता के बाद इसकी घोषणा की थी कि अफगान सरकार और तालिबान के बीच सीधी वार्ता मार्च में पाकिस्तान में होगी।
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