भोपाल, 11 मार्च (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश के सरकारी अधिकारी और कर्मचारी अपनी 71 सूत्रीय मांगों को लेकर शुक्रवार को एक दिवसीय सामूहिक अवकाश पर हैं, जिसे हड़ताल माना जा रहा है। दफ्तरों में ताले लटके हुए हैं, कामकाज पूरी तरह ठप है।
अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर प्रदेश के 35 कर्मचारी संगठन इस हड़ताल में शामिल हैं, इससे राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के तहसील स्तर तक के दफ्तर बंद हैं। नतीजा है कि कहीं भी कोई सरकारी कामकाज नहीं हो रहा है। इस हड़ताल में पांच लाख से ज्यादा कर्मचारियों के शामिल होने का दावा किया गया है।
सामूहिक अवकाश पर गए अधिकारियों और कर्मचारियों की मुख्य मांगों में दैनिक वेतन भोगियों, संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण और अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करना शामिल हैं। इसके अलावा वार्षिक वेतनवृद्धि का लाभ दिए जाने और एरियर का नगद भुगतान किए जाने की मांगें भी की गई हैं।
इस हड़ताल में शामिल कर्मचारी संगठनों के नेता वीरेंद्र खोंगल और अरुण द्विवेदी का दावा है कि पूरे प्रदेश के कर्मचारी और अधिकारी सामूहिक अवकाश पर हैं और इसका व्यापक असर पड़ा है। वहीं आवश्यक सेवाओं, जैसे जलप्रदाय और दूध आपूर्ति आदि को इस हड़ताल से दूर रखा गया है।
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