बेंगलुरू, 11 मार्च (आईएएनएस)। अंटार्टिका में 26 देशों के 150 अन्वेषक 13 दिनों के अध्ययन पर जा रहे हैं जिसमें 17 युवा भारतीय भी शामिल हैं।
बेंगलुरू, 11 मार्च (आईएएनएस)। अंटार्टिका में 26 देशों के 150 अन्वेषक 13 दिनों के अध्ययन पर जा रहे हैं जिसमें 17 युवा भारतीय भी शामिल हैं।
रविवार को शुरू होने वाली इस यात्रा में अन्वेषक ग्लोबल वार्मिग के कारण हुए जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का अध्ययन करेंगे।
अभियान के समन्वयक सामंथा वान रुईटेन ने आईएएनएस को बताया, “150 पुरुषों व महिलाओं के समूह में 8 महिलाएं और 9 पुरुष भारत से हैं। इनमें छात्र, तकनीकविद, शोधकर्ता, अधिकारी व गैर सरकारी संगठनों के सदस्य है। “
वे बताते हैं कि यह यात्रा ग्रीन हाउस गैसों के दुष्प्रभाव, शहरीकरण, लगों को बदलती जीवन शैली और अत्यधिक उपभोग के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए की जा रही है।
सामंथा ने बताया, “यह यात्रा ‘लीडरशिप ऑन द ऐज’ कार्यक्रम के तहत की जा रही है और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव को जांचने के लिए अंटार्टिका सबसे उपयुक्त जगह है।”
इस तरह की पहली यात्रा 2003 में हुई थी जिसमें 18 देशों के 43 अन्वेषकों ने भाग लिया था। उसके बाद 2015 में 22 देशों के 110 अन्वेषक अंटार्टिका गए थे।
अंतर्राष्ट्रीय अंटार्टिका अन्वेषण (आईएई2016) की सदस्य 28 वर्षीया डी. चंद्रिका ने पुणे से आईएएनएस को बताया, “मैं अंटार्टिका यात्रा को लेकर काफी उत्साहित हूं क्योंकि यह दुनिया का दक्षिणी गोलार्ध में सबसे ठंडा, सबसे सूखा और सबसे तेज हवाओं वाला इलाका है। इससे मुझे एक अंजाने महादेश को देखने और वहां ग्लोबल वार्मिग के दुष्प्रभावों का अध्ययन करने का मौका मिलेगा।”
ब्रिटेन के जाने माने पर्यावरणविद और ध्रुवीय अन्वेषक और यात्रा दल के प्रमुख रावर्ट स्वान ने बताया कि 13 मार्च से 25 मार्च होने वाली इस यात्रा में अक्षय ऊर्जा स्रोत, पर्यावरण स्थिरता और जलवायु संरक्षण पर जोर दिया जाएगा।
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