मप्र में 69 फीसद बच्चे और 52 फीसदी महिलाएं एनीमिया की शिकार!

भोपाल, 14 मार्च (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश में बच्चों और महिलाओं को सेहतमंद बनाने के लिए अनेक योजनाएं चल रही हैं, मगर इसके बावजूद राज्य के 69 प्रतिशत बच्चे और 52 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया (खूान की कमी) की शिकार हैं। यह खुलासा किया है भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-चार (एनएफएचएस-चार) ने।

भोपाल, 14 मार्च (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश में बच्चों और महिलाओं को सेहतमंद बनाने के लिए अनेक योजनाएं चल रही हैं, मगर इसके बावजूद राज्य के 69 प्रतिशत बच्चे और 52 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया (खूान की कमी) की शिकार हैं। यह खुलासा किया है भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-चार (एनएफएचएस-चार) ने।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के लिए यह सर्वेक्षण एकेडमी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (एएमएस) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मैनेजमेंट रिसर्च (आईआईएचएमआर) ने 29 जनवरी से 24 जुलाई 2015 के बीच किया था। इसके लिए कुल 52 हजार 042 घर (हाउस होल्ड) की 62 हजार 803 महिलाओं और 9510 पुरुषों से संपर्क किया गया।

एनएएफएचएस-चार की रिपोर्ट बताती है कि राज्य में छह माह से 59 माह तक के 68़ 9 प्रतिशत बच्चे एनीमिक हैं। इनमें शहरी इलाके के 66़3 प्रतिशत और 69़ 9 बच्चे ग्रामीण इलाकों से आते है। बीते 10 वर्षो में बच्चों की एनीमिया की स्थिति पर गौर करें तो पता चलता है कि वर्ष 2005-06 की एनएफएचएस-तीन की रिपोर्ट में यह आंकड़ा 74 प्रतिशत था, इस तरह बीते 10 वर्षो में एनीमिक बच्चों की संख्या में पांच प्रतिशत का सुधार आया है।

एक तरफ जहां बड़ी संख्या में बच्चे एनीमिया का शिकार हैं, वहीं महिलाएं की स्थिति भ्ीा बेहतर नहीं है। जो महिलाएं 15 से 49 वर्ष की हैं और गर्भवती नहीं हुई हैं, उनमें से 52़.4 प्रतिशत एनीमिया पीड़ित हैं, जबकि गर्भवती महिलाओं की संख्या 54़ 6 प्रतिशत है। अगर कुल महिलाओं की स्थिति पर गौर करें तो पता चलता है कि 52.़5 प्रतिशत महिलाएं एनीमिक हैं। बीते 10 वर्षो में यानी 2005-06 की तुलना में दोनों ही वर्ग की महिलाओं मे लगभग तीन प्रतिशत का सुधार आया है।

राज्य में एनीमिक पुरुषों की संख्या भी कम नहीं है। एनएएफएचएस-चार के मुताबिक, 25़5 प्रतिशत पुरुष एनीमिक हैं। बीते दस वर्षो में पुरुषों में एनीमिया बढ़ा है। वर्ष 2005-06 की एनएएफएचएस-तीन में यह आंकड़ा 25़ 4 प्रतिशत था।

मध्यप्रदेश चिकित्सक अधिकारी संघ के प्रांताध्यक्ष और वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. ललित श्रीवास्तव ने आईएएनएस से कहा कि एनीमिया की मूल वजह असंतुलित भोजन और जागरूकता का अभाव है। लोगों को पता ही नहीं होता कि उनके शरीर के लिए किए विटामिन की जरूरत है, लिहाजा वे संतुलित भोजन नहीं लेते, परिणामस्वरूप एनीमिक हो जाते हैं। यह कोई बीमारी नहीं है, इसे संतुलित भोजन से सुधार जा सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि बच्चों के एनीमिक हेाने की मूल वजह साफ सफाई पर ध्यान न देना है। गंदगी केकारण बच्चों के पेट में बर्म (कीड़े) हो जाते हैं, जिससे उनके अंदर खून की कमी हो जाती है। समाज में जागरूकता लाई जाए और संतुलित भोजन के बारे में बताया जाए तो खून की कमी दूर की जा सकती है।

यहां बताना लाजिमी है कि राज्य में महिला बाल विकास विभाग द्वारा संचालित आंगनवाड़ी केंद्रों से बच्चों और महिलाओं को पोषण आहार दिया जाता है। बच्चों को तो दूध तक देने की व्यवस्था है, उसके बाद भी महिलाएं और बच्चों की सेहत में ज्यादा सुधार नहीं आ पा रहा है।

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