पाकिस्तान में होली, दिवाली की छुट्टी की तारीफ

इस्लामाबाद, 18 मार्च (आईएएनएस)। पाकिस्तान में होली, दिवाली पर हिंदुओं और ईस्टर पर ईसाइयों के लिए छुट्टी की घोषणा का स्वागत करते हुए यहां के एक दैनिक अखबार ने शुक्रवार को इस नीति की प्रशंसा की।

अखबार ने हालांकि इस बात पर जोर दिया है कि वास्तव में गैर मुस्लिम समुदायों के लोगों को और अधिक स्वास्थ्य सुविधा, शिक्षा व रोजगार तक पहुंच तथा अधिक सहिष्णु समाज की जरूरत है।

समाचारपत्र द नेशन के संपादकीय आलेख ‘स्टैंडिंग बाइ माइनॉरिटी’ में कहा गया है कि अंतत: पाकिस्तान के हिंदू और ईसाई अल्पसंख्यकों को होली, दिवाली और ईस्टर पर सीमित छुट्टी मिल गई। इसके लिए इन्हें बधाई देनी चाहिए।

संबद्ध धर्म के लोग अब इन अवसरों पर अपने स्कूलों और कार्यालयों से छुट्टी ले सकते हैं।

पाकिस्तानी दैनिक के मुताबिक, पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) पार्टी हाल के दिनों में सुर्खियों रही है। लोगों को लगता है कि देश को संयत विचारधारा की दिशा में ले जाया जा रहा है। इस पर हर कोई दुख जताता है, क्योंकि वे इसे सजा के तौर पर देख रहे हैं।

संपादकीय में यह भी कहा गया है कि अब यह देखना होगा कि संयत नीति बनाने की ओर सरकार का नया झुकाव आतंकवाद से मुकाबला करने की दिशा में सही प्रयास है जो परिणाम के रूप में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को पुख्ता करता है या पश्चिमी देशों को संतुष्ट करने के लिए है।

अखबार का कहना है कि बहुसंख्यक लोगों के लिए शायद यह कल्पना करना भी मुश्किल है कि पर्व के दिन भी काम करने से अल्पसंख्यक वर्ग अपने आपको अलग-थलग महसूस करते हैं।

अखबार का मानना है, “अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न तब शुरू होता है, जब उन्हें दूसरे दर्जे का नागरिक समझा जाता है और धार्मिक स्वतंता जैसे मूल अधिकार से वंचित किया जाता है। इतना ही नहीं, धार्मिक अवसरों पर उन्हें अवकाश देने से मना करने का मतलब है पाकिस्तान अल्पसंख्यकों को पराधीन बनाना।”

संपादाकीय के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार की यह पहल बहुत छोटी है। पाकिस्तान को इस दिशा में अभी लंबी दूरी तय करनी होगी, ताकि अल्पसंख्यक यह महसूस कर सकें कि देश अब और उन्हें अपने से अलग नहीं मानता है जो पहले मानता था।

पाकिस्तानी अखबार का यह भी कहना है कि विभाजन के समय अलग-थलग पड़ने से अल्पसंख्यकों और बहुसंख्यकों के बीच जो आर्थिक विषमता बनी, उसे भी सरकार को दूर करना होगा।

अंत में संपादकीय का कहना है कि इस उपमहादेश की धरती कभी विविधता में एकता के लिए प्रसिद्ध थी। इसलिए पाकिस्तान के लिए अब वह समय आ गया है कि वह भी उस परंपरा के अनुसरण की दिशा में अपनी यात्रा शुरू करे।

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