यह अनुमान एक आनुवांशिक अध्ययन के आधार पर जताया गया है, जिसके नतीजे अमेरिकी जर्नल ‘साइंस’ में प्रकाशित हुए हैं।
यह अध्ययन ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और ब्राजील के इवांड्रो चजास संस्थान के वैज्ञानिकों ने किया। उन्होंने ब्राजील के जीका वायरस के सात जीनोम को अनुक्रम में रखा, जिसमें एक वयस्क की जीका वायरस के कारण हुई मौत और माइक्रोसिफेली से पीड़ित एक नवजात को भी शामिल किया गया।
अध्ययन के नतीजे गुरुवार को सामने आए, जिसके मुताबिक अमेरिकी देशों में जीका वायरस मई और दिसंबर 2013 के बीच सामने आया था। वहीं, ब्राजील में जीका का पहला मामला मई 2015 में सामने आया था।
शोधकर्ताओं ने हवाई आंकड़ों पर भी गौर किया, जिससे यह पता चला कि जीका प्रभावित क्षेत्रों से ब्राजील आने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ी है।
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में जंतुविज्ञान विभाग के जीवविज्ञानी प्रोफेसर ओलिवर पाइबस के मुताबिक, “ऐसी संभावना है कि अमेरिकी देशों में जीका वायरस फ्रेंच पोलिनेशिया से आया है। यह भी संभव है कि जीका दक्षिणपूर्व एशिया से अमेरिका और फ्रेंच पोलिनेशिया में अलग-अलग फैला हो।”
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