हेग, 30 मार्च (आईएएनएस)। इटली ने बुधवार को यहां एक मध्यस्थता न्यायाधिकरण से कहा कि उसके नौसैनिक सल्वाटोर गिरोन को हर हाल में भारत से अपने देश लौटने की इजाजत मिलनी चाहिए। ऐसा नहीं होने पर उसे चार साल और भारत में रहने का खतरा है।
गिरोन उन दो इतालवी नौसैनिकों में एक है जिन पर वर्ष 2012 में समुद्री डाकू विरोधी अभियान में दो भारतीय मछुआरों की हत्या का आरोप है।
समाचार एजेंसी अन्सा के अनुसार, “इस घटना के बाद से गिरोन को थोड़े-थोड़े समय के लिए कुछ अवसरों को छोड़कर वतन लौटने की अनुमति नहीं मिली है।”
दूसरे नौसैनिक मैसीमिलियानो लाटोरे को वर्ष 2014 में दिल का दौरा पड़ा था और तब उसे भारत से इटली लौटने की इजाजत मिली थी।
भारत में इस मामले की सुनवाई में बार-बार देर होने पर इटली सरकार इस मामले को अंतर्राष्ट्रीय न्यायाधिकरण में लेकर गई।
इस न्यायाधिकरण में इटली के प्रतिनिधि राजदूत फ्रांसेस्को अजरेलो ने बुधवार को कहा कि इस मध्यस्थता को खत्म होने में कम से कम तीन या चार साल लगेंगे। इसका अर्थ है कि बिना किसी तरह के आरोप निर्धारण के गिरोन को भारत में कुल सात-आठ साल रहना होगा।
अजरेलो ने कहा कि यह उसके मानवाधिकारों का बड़ा उल्लंघन होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि वह गिरोन को भारत से वापस लाने के लिए दी गई याचिका से उम्मीद लगाए हैं।
अजरेलो ने कहा, “यह आशावादी या निराशावादी होने का सवाल नहीं है। स्वाभाविक है कि इटली ठोस मानवीय एवं कानूनी तर्को से उम्मीद कर रहा है, नहीं तो वह यहां नहीं आया होता।”
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