देहरादून, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्र के बजट अध्यादेश को चुनौती देने के लिए उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और पूर्व संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा हृदयेश की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए शुक्रवार को नैनीताल उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
हरीश रावत की ओर से मामले की पैरवी कपिल सिब्बल ने की। अदालत ने केंद्र सरकार को पांच अप्रैल तक केंद्र के बजट अध्यादेश पर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई छह अप्रैल को होगी।
इस बाबत नैनीताल हाईकोई में शुक्रवार को दो याचिकाएं दायर की गई थीं। वरिष्ठ अधिवक्ता व पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल इन याचिकाओं पर हरीश रावत की ओर से पैरवी कर रहे थे। इसके लिए कपिल सिब्बल शुक्रवार को नैनीताल पहुंचे।
गौरलतब है कि उत्तराखंड में वित्तीय संकट को टालने के लिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने संसद के बजट सत्र का सत्रावसान कर दिया था। राज्य में जारी सियासी संकट और यहां लागू राष्ट्रपति शासन के कारण एक अप्रैल के बाद खर्च के लिए धन की जरूरत को पूरा करने के लिए ऐसा करना जरूरी था।
केंद्र सरकार अध्यादेश के जरिए राज्य के खर्च की व्यवस्था करेगी। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में संसदीय मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक में राष्ट्रपति से सत्रावसान की सिफारिश करने का अप्रत्याशित फैसला किया गया था।
पिछले दिनों उत्तराखंड विधानसभा में विवादित परिस्थिति में स्पीकर द्वारा विनियोग विधेयक के पारित होने की घोषणा करने पर उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने यह फैसला किया था।
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