चेन्नई, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज इनवेस्टर्स सर्विस ने मंगलवार को कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा मुख्य दर में की गई 25 आधार अंकों की कटौती उम्मीद के अनुरूप है और कई पहलू हैं, जिनसे वित्तीयन की स्थिति प्रभावित होगी।
मूडीज ने एक बयान में कहा कि तरलता का प्रावधान और बैंकों की खाता-बही दुरुस्त करने की दिशा में होने वाली प्रगति जैसे कई पहलुओं से देश में वित्तीयन की स्थिति तय होगी।
मूडीज ने कहा, “दूसरी बात (बैंकों की खाता-बही दुरुस्त करना) कई साल की प्रक्रिया है, जिसकी सफलता देश में ऋण और निवेश बढ़ाने में महत्वपूर्ण होगी। यह टिकाऊ और तेज विकास में मदद करेगी।”
मूडीज के मुताबिक, सिर्फ आय बढ़ाने के उपाय और वर्तमान विकास दर या इससे अधिक की जीडीपी विकास दर से ही वित्तीय घाटा कम किया जा सकता है, न कि सिर्फ सरकारी खर्च में सुधार से।
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि सामान्य विकास दर और कम वैश्विक कमोडिटी मूल्यों के कारण महंगाई दर वर्तमान स्तर के आसपास बनी रहेगी।
मूडीज के मुताबिक, “प्रतिकूल मौसम से खाद्य कीमतें बढ़ने, रुपये में भारी गिरावट और वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने से वेतन और मूल्यों में व्यापक स्तर पर होने वाली वृद्धि से महंगाई बढ़ सकती है।”
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि भारत यद्यपि अन्य उभरती अर्थव्यवस्था की तरह वैश्विक बाजार से अधिक जुड़ा हुआ नहीं है, फिर भी यह पूरी तरह अप्रभावित भी नहीं रह सकता है।
मूडीज ने कहा, “निर्यात में गत वर्ष गिरावट देखी गई, जिससे वैश्विक मांग कम रहने का पता चलता है। इतना ही नहीं पोर्टफोलियो निवेश 2014 से 2015 की शुरुआत तक अधिक रहने के बाद हाल के महीने में कम रहा है।”
मूडीज ने कहा कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में वृद्धि से चालू खाता घाटा के लिए स्थायी वित्तीयन मिला है।
मूडीज ने कहा, “खासकर तेल मूल्य घटने से देश का आयात खर्च कम हुआ है, जिसके कारण वित्तीयन की जरूरत घटी है। अस्थिर वैश्विक वित्तीय स्थिति के बीच एफडीआई में वृद्धि और चालू खाता घाटा में कमी देश के लिए सकारात्मक है।”
dharmpath.com dharmpath