लंदन, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। जीवनसाथी की मौत के बाद दिल की धड़कनों के अनियमित होने की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। एक शोध में यह जानकारी दी गई है।
इसमें बताया गया है कि यह खतरा 60 साल से कम उम्र वालों में ज्यादा होता है। इस स्थिति को ‘एट्रियल फिब्रिलेशन’ कहा जाता है, जिससे स्ट्रोक और हृदय गति रुकने का खतरा बढ़ जाता है।
डेनमार्क के शोधकर्ताओं के मुताबिक, अत्यधिक तनाव के कारण दिल की धड़कन पर सीधा असर पड़ता है।
डेनमार्क के आरहस विश्वविद्यालय से संबद्ध सिमोन ग्राफ ने बताया, “यह खतरा उनके लिए ज्यादा है, जो युवा होते हैं और जिन्होंने अपेक्षाकृत स्वस्थ साथी को खो दिया हो।”
यह शोध ओपेन हार्ट नाम के ऑनलाइन जर्नल में प्रकाशित किया गया है।
इसमें बताया गया है कि जीवनसाथी की मौत के 8 से 14 दिनों तक इसका खतरा सबसे ज्यादा रहता है, हालांकि बाद में यह धीरे-धीरे कम हो जाता है।
शोधकर्ताओं ने बताया कि ऐसे लोगों को दिल की धड़कन की अनियमितता के अलावा भावनात्मक तनाव का खतरा भी होता है। इससे हृदय रोग का खतरा और बढ़ जाता है।
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