नई दिल्ली, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को कर्ज नहीं चुका पाने के मामले में फंसे उद्योगपति विजय माल्या को भारत व विदेशों में स्थित उनकी सभी संपत्तियों -चल और अचल, मूर्त और अमूर्त- व अन्य शेयरधारिताओं तथा लाभकारिता हितों का 21 अप्रैल तक खुलासा करने का निर्देश दिया।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरिमन की पीठ ने माल्या को उन सभी संपत्तियों व परिसंपत्तियों के बारे में बताने के लिए कहा है, जो उनकी पत्नी व बच्चों के नाम पर है। अदालत ने वह तारीख बताने के लिए भी कहा, जिस दिन वह व्यक्तिगत रूप से अदालत के समक्ष पेश हो सकते हैं।
अदालत ने कहा, “वरिष्ठ वकील (माल्या के वकील सीएस वैद्यनाथन) अदालत के सामने (माल्या के) व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की संभावित तिथि पर निर्देश लेंगे।”
अदालत ने कहा कि माल्या अपने हलफनामे में यह भी बताएंगे कि मामले को सार्थक ढंग से निपटारा करने के लिए और अपनी प्रमाणिकता साबित करने के लिए वह अदालत में कितनी राशि जमा करेंगे
अदालत ने उनसे हलफनामे में उनके, उनकी पत्नी और उनके बच्चों के नाम देश और विदेश में मौजूद संपत्ति का संपूर्ण ब्यौरा देने के लिए कहा।
संपत्ति का ब्यौरा मांगे जाने पर वकील वैद्यनाथन ने कहा कि मार्च 2010 में ऋण वापस करने के लिए व्यक्तिगत गारंटी देते समय सभी ब्यौरा दे दिया गया था।
इस पर न्यायमूर्ति नरिमन ने उस सूचना को अद्यतन करने के लिए कहा।
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) नेतृत्व में 14 बैंकों के एक संघ ने अदालत को बताया था कि उसने माल्या के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है, जिसमें उन्होंने अपने 9,000 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया राशि को सितंबर तक 4,000 करोड़ रुपये देकर निपटाने की बात कही है।
बैंकों ने यह लोन उनकी विमानन कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस को दिया था।
बैंकों ने अदालत से कहा कि माल्या से छह अप्रैल की शाम मिला संशोधित प्रस्ताव भी ठुकरा दिया गया है।
माल्या ने 30 मार्च को प्रस्ताव दिया था कि वह सितंबर तक 4,000 करोड़ रुपये नकद भुगतान करेंगे। इसके अलावा वह 2,000 करोड़ रुपये और देंगे, जो उन्हें बहुराष्ट्रीय कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक के विरुद्ध दाखिल किए गए एक मामले में मिलने की उम्मीद है।
अदालत ने ओरिएंटल बैंक की भी एक याचिका स्वीकार कर ली। ओरिएंटल बैंक ने कहा कि वह एसबीआई के नेतृत्व वाले संघ का हिस्सा नहीं है, लेकिन दो अन्य संघों का हिस्सा है, जिसने माल्या को ऋण दिया है।
एसबीआई के नेतृत्व वाले संघ ने गुरुवार को अदालत में कहा कि वह निपटारा करने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए माल्या की संपत्तियों का वाजिब खुलासा होना जरूरी है।
एसबीआई के अलावा किंगफिशर को ऋण देने वाले अन्य बैंकों में शामिल हैं बैंक ऑफ बड़ौदा, फेडरल बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, जम्मू एंड कश्मीर बैंक, आईडीबीआई बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, पंजाब एंड सिंद बैंक, यूको बैंक और युनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया।
इस मामले की अगली सुनवाई 26 अप्रैल को निश्चित की गई है।
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