संयुक्त राष्ट्र, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत ने मध्य-पूर्व में शांति प्रक्रिया के विफलता की ओर बढ़ने पर खेद जताया है। लेकिन इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने के लिए इजरायल या फिलिस्तीन की सीधे आलोचना करने से परहेज किया है।
संयुक्त राष्ट्र, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत ने मध्य-पूर्व में शांति प्रक्रिया के विफलता की ओर बढ़ने पर खेद जताया है। लेकिन इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने के लिए इजरायल या फिलिस्तीन की सीधे आलोचना करने से परहेज किया है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के उप स्थाई प्रतिनिधि तन्मय लाल ने सोमवार को सुरक्षा परिषद में कहा कि फिलिस्तीन और इजरायल की बातचीत फिर से शुरू करने के प्रयास विफल हो गए। इसकी जगह हम ने गाजा में दुर्भाग्यपूर्ण एकतरफा कार्रवाई में वृद्धि देखी है। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि दोनों के बीच दूरी बढ़ती जा रही है।
लाल ने सुरक्षा परिषद की मध्य-पूर्व की स्थिति पर बहस में भाग लिया था। उस बहस में इजरायल को अपने लंबे समय से सहयोगियों सहित कई देशों की कड़ी आलोचना झेलनी पड़ी। खासकर इजरायल जो फिलिस्तीन के भूभाग में अपनी बस्तियां बना रहा है और जिस तरह से फिलिस्तीन के हमलों का वह बदला ले रहा है, उसे लेकर इजरायल की बहुत आलोचना हो रही है।
भारत और इजरायल के बीच निकट संबंधों की झलक पेश करते हुए लाल ने इजरायल की सीधे आलोचना करने से परहेज किया। यही नहीं इजरायल का नाम भी सिर्फ एक वाक्य में ही लिया। हालांकि उन्होंने पक्षों की एकतरफा कार्रवाई कहकर दोनों की आलोचना की।
यहीं पर, उन्होंने यह भी कहा कि हमारी फिलिस्तीनियों के ध्येय से हमारी सतत प्रतिबद्धता है और फिलिस्तीन की जनता से दोस्ती भारत की विदेश नीति का अनिवार्य हिस्सा है। उन्होंने इस समस्या के हल के रूप में भारत के एक सार्वभौमिक, स्वतंत्र, सुकर और पूर्वी जेरूशलम राजधानी के साथ सुरक्षित एवं मान्यता प्राप्त सीमा और इजरायल के साथ शांतिपूर्ण रिश्ते वाला एकीकृत फिलिस्तीन राष्ट्र की बात दोहराई।
लाल ने यमन के मुद्दे पर कहा कि भारत शांति वार्ता की योजना से उत्साहित है और उम्मीद करता है कि यह वार्ता जल्द होगी और उसके सकारात्मक परिणाम आएंगे।
उन्होंने कहा कि सीरिया के शरणार्थियों की सहायता के लिए भारत ने 40 लाख डॉलर योगदान दिया है। इसके साथ ही भारत ने गत फरवरी में सीरिया पर लंदन में हुई बैठक में भी भाग लिया था। वहां भारत ने सीरिया को द्विपक्षीय मानवीय सहायता देने की प्रतिबद्धता जताई थी।
इससे पहले इजारयल की आलोचना की शुरुआत करते हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की-मून ने कहा, “विध्वंस और बस्तियां खड़ी कर नया तथ्य पैदा करने से इस बारे में सवाल खड़े हुए हैं कि क्या इजरायल का अंतिम लक्ष्य वास्तव में फिलिस्तीनियों को वेस्ट बैंक के कुछ खास हिस्सों से बेदखल करना, और उसके बाद एक सुकर फिलिस्तीन राष्ट्र की संभावना को क्षीण करना है।”
बान ने अहिंसा, लोकतंत्र और फिलिस्तीन मुक्ति संगठन के सिद्धांतों पर आधारित वास्तविक एकजुटता बनाने में आंतरिक बातचीत की लगातार विफलता को लेकर फिलिस्तीनियों की भी आलोचना की।
उन्होंने कहा कि गाजा से इजरायल जाने वाली सुरंग का पता लगने से वह चिंतित हैं। उन्होंने फिलिस्तीनियों से आग्रह किया कि उन्हें हमले के लिए सुरंग निर्माण और इजरायल पर रॉकेट दागने जैसी हरकतें बंद कर देनी चाहिए।
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