..तो नहीं लग पाएंगे बुंदेलखंड में 2,560 हैंडपंप!

बांदा, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। सूखे की मार झेल रहे उत्तर प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड के सात जिलों में पेयजल की किल्लत दूर करने के लिए 1,862 लाख रुपये की लागत से लगने वाले 2,560 हैंडपंपों को लगाए जाने की उम्मीद क्षीण होती नजर आ रही है। उप्र जल निगम के मुख्य अभियंता राजेश मित्तल द्वारा जिलाधिकारियों को भेजे पत्रों से तो यही प्रतीत होता है।

बांदा, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। सूखे की मार झेल रहे उत्तर प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड के सात जिलों में पेयजल की किल्लत दूर करने के लिए 1,862 लाख रुपये की लागत से लगने वाले 2,560 हैंडपंपों को लगाए जाने की उम्मीद क्षीण होती नजर आ रही है। उप्र जल निगम के मुख्य अभियंता राजेश मित्तल द्वारा जिलाधिकारियों को भेजे पत्रों से तो यही प्रतीत होता है।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने हाल ही के दौरे के दौरान सरकार की खूबियां गिनाते हुए महोबा, चित्रकूट और ललितपुर की जनसभा में बुंदेलखंड की पेयजल समस्या के त्वरित निदान के लिए 1,862 लाख रुपये की लागत से झांसी में 400 हैंडपंप, जालौन में 500, ललितपुर में 600, बांदा में 160, महोबा में 200, हमीरपुर में 200 व चित्रकूट में 500 हैंडपंप अधिष्ठापन को फोकस किया था, इन हैंड़पंपों को लगाए जाने जिम्मेदारी जल निगम को सौंपे जाने की घोषण की थी। लेकिन मुख्यमंत्री की घोषणा पर शासन के जटिल नियम ने पानी फेर दिए हैं।

हाल ही में उत्तर प्रदेश जल निगम के मुख्य अभियंता राजेश मित्तल ने सभी सात जिलाधिकारियों को जो पत्र भेजे हैं, उससे नहीं लगता कि बुंदेलखंड में बिना नियम शिथिल किए इनका अधिष्ठापन संभव हो सकेगा। पत्र में कहा गया है, “हैंडपंप अधिष्ठापन में शासन ने जो मानक निर्धारित किया है, उसके अनुसार एक हैंडपंप में 150 की आबादी लाभान्वित हो और एक से दूसरे हैंडपंप की दूरी कम से कम 75 मीटर होना आवश्यक है। जबकि बुंदेलखंड में पहले से ही 60 की आबादी पर हैंडपंप का अधिष्ठापन है।”

मुख्य अभियंता ने अपने पत्र में साफ कहा, “बिना नियम शिथिल किए बुंदेलखंड के किसी गांव में हैंड़पंप नहीं लगाया जा सकता।”

उत्तर प्रदेश विधानसभा में बसपा विधायक दल के उपनेता और बांदा जिले की नरैनी सीट से विधायक गयाचरण दिनकर कहते हैं, “मुख्यमंत्री ने एक बार फिर बुंदेलियों को ठगने की कोशिश की है, अगर सचमुच पेयजल किल्लत दूर करना चाहते हैं तो धनराशि आवंटन से पूर्व उन्हें मानक और नियम शिथिल करना चाहिए।” वह कहते हैं, “यह नियम और मानक दो दशक पहले शासन ने बनाए थे, जिन्हें जनहित में शिथिल किया जाना आवश्यक है।”

कुल मिलाकर यह है कि यदि मानक और नियम शिथिल न किए गए तो बुंदेलखंड में 2,560 हैंडपंप नहीं लग पाएंगे।

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