गुटबाजी से उबर पाएगी उप्र भाजपा?

हमीरपुर, 23 अप्रैल (आईएएनएस/आईपीएन)। हाल में ही बुंदेलखंड के दौरे पर आए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष भले ही मीडिया में सुर्खियों में रहे, मगर जमीनी हकीकत उससे उलट है। हमीरपुर सहित कई जिलों में प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत में आयोजित कार्यक्रम वाकई गुटबाजी की भेंट चढ़ गए।

हमीरपुर, 23 अप्रैल (आईएएनएस/आईपीएन)। हाल में ही बुंदेलखंड के दौरे पर आए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष भले ही मीडिया में सुर्खियों में रहे, मगर जमीनी हकीकत उससे उलट है। हमीरपुर सहित कई जिलों में प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत में आयोजित कार्यक्रम वाकई गुटबाजी की भेंट चढ़ गए।

पिछड़े वर्ग के मतदाताओं पर अपना जादू चलाने के लिए प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए केशव प्रसाद मौर्य के लिए मिशन-2017 फतेह करना आसान नहीं होगा, क्योंकि पार्टी के अंदर ही भितरघातियों की एक बड़ी फौज है, जो चुप बैठने वाली नहीं है।

पिछले दिनों कार्यकर्ताओं में जोश भरने आए केशव मौर्य का कार्यक्रम यहां पर बिल्कुल फ्लॉप रहा। गिने-चुने लोग ही स्वागत कार्यक्रम में भाग लेने आए। इससे यह स्पष्ट हो गया कि यहां पार्टी का कैडर कार्यकर्ता भी पार्टी से धीरे-धीरे मुंह मोड़ता जा रहा है।

कार्यक्रम फेल होना हालांकि कार्यक्रम संयोजक की अदूरदर्शिता का परिणाम बताया जाता है।

जानकारी के मुताबिक, प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद जैसे ही जनपद में प्रोटोकाल प्राप्त हुआ वैसे ही अन्य राजनीतिक दलों के लोगो में एक बेचैनी देखी जा रही थी कि कहीं नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष मौर्य पिछड़ी व अगड़ी जातियों में कोई जादू न कर जाए। मगर उनके स्वागत समारोह में जब गिने-चुने लोग शामिल हुए तो सपा बसपा कांग्रेस समेत सरकार की खुफिया एजेंसी ने भी राहत की सांस ली।

पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि कार्यक्रम संयोजक, जिनके हाथों में कार्यक्रम की कमान सौंपी गई थी, वह स्वयं यहां पर नहीं रहते। इसलिए ज्यादातर पार्टी कार्यकर्ता कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। पार्टी में टिकट के दावेदारों की हालांकि लंबी लाइन लगी हुई है।

प्रदेश अध्यक्ष का कार्यक्रम जिस तरह फ्लॉप हुआ, उससे यह साबित हो गया है कि पार्टी को आगामी विधानसभा चुनाव मंे बहुत ही कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। मजे की बात तो यह है कि पार्टी मंे नेताओं ने संख्या जुटाने में भी कोई रुचि नहीं ली।

हालांकि सुमेरपुर व कुरारा क्षेत्र में ज्यादातर कार्यकर्ता कुलदीप निषाद व बाबूराम निषाद के ही देखे गए। दोनों क्षेत्रों में जिस प्रकार से पार्टी नेताओं ने बैनर, होर्डिग, पोस्टर से सड़कों को पाटा था, उस प्रकार से कार्यकर्ताओं के न आने से प्रदेश अध्यक्ष को भी भारी झटका लगा है।

कार्यकर्ताओं ने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष के आगमन के पहले वरिष्ठ नेताओ ने कोई ठोस रणनीति तय नहीं की थी। उधर कार्यक्रम संयोजक ऐसे व्यक्ति को बनाया गया था, जिसका पार्टी में कोई जनाधार नहीं है।

भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि प्रदेश अध्यक्ष के आगमन में जब पार्टी कार्यकर्ताओं की संख्या जुटाने में यह हालत है तो आगामी आने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी की क्या दुर्दशा होगी, इसका अंदाज अभी से लगाया जा सकता है।

प्रदेश अध्यक्ष के आगमन पर देखा गया कि पार्टी का युवा कार्यकर्ता एकदम कटा-कटा सा रहा। हालांकि पार्टी के अंदर चल रही गुटबाजी का भी इसका परिणाम माना जा रहा है।

इधर भाजपा के अन्य सहयोगी संगठनों का कहना है कि यहां के पार्टी लीडर दो-एक को छोड़कर कोई भी पार्टी की ओर ध्यान नहीं दे रहा है। चुनाव नजदीक आने पर टिकट के लिए लोगों की लंबी लाइन लग जाएगी।

कार्यक्रम फ्लॉप होने से सपा बसपा के नेताओं की एकदम बाछें खिल गई हैं और वे विधानसभा चुनाव की तैयारी में पूरे जोश-खरोश से जुट गए हैं।

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