इंडोनेशिया में पिछले साल भी मादक पदार्थो की तस्करी के आरोप में 14 लोगों को मौत की सजा दी गई थी।
इनमें इंडोनेशिया के मूल निवासी और विदेशी दोनों ही शामिल थे। इस मामले में जिन विदेशी नागरिकों को मौत की सजा मिली थी, उन देशों के साथ इंडोनेशिया के राजनयिक तनाव उभरकर सामने आए थे। मादक पदार्थो के ये तस्कर नीदरलैंड, वियतनाम, ब्राजील, नाइजीरिया, घाना, ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस के रहने वाले थे।
मादक पदार्थों के सेवन की समस्या के खिलाफ युद्ध छेड़ने वाले इस कठोर कदम से इंडोनेशिया को ब्राजील, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों की कठोर राजनयिक आलोचनाएं झेलनी पड़ी थीं। यहां तक कि कुछ देशों ने इंडोनेशिया से अपने राजदूत वापस बुलाते हुए उसके साथ राजनयिक संबंध भी तोड़ लिए थे।
देश में मादक पदार्थो के दुरुपयोग के मुद्दे से निपटने के लिए इंडोनेशिया के ²ढ़ संकल्प के बारे में वरिष्ठ राजनयिक रचमाट बुदिमान ने कहा है कि इन अपराधियों की वजह से इंडोनेशिया के लोगों का जीवन खतरे में पड़ता है। खासकर युवा पीढ़ी इनके कर्मो से सर्वाधिक प्रभावित होती है।
रचमाट ने हाल ही में न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में ‘वर्ल्ड ड्रग प्रॉब्लम’ पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के विशेष सत्र में इंडोनेशियाई प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था।
इस समारोह में रचमाट द्वारा दिए गए एक बयान का हवाला देते हुए इंडोनेशियाई विदेश विभाग की ओर से शुक्रवार को जारी एक रपट में कहा गया है, “इंडोनेशिया मादक पदार्थो के तस्करों के खिलाफ यह कठोर सजा लागू करता है। सजा का क्रियान्वयन मानवाधिकारों के सिद्धांतों से संबंधित है।”
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