उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन को लेकर बाधित हुई संसद की कार्यवाही (राउंडअप)

नई दिल्ली, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन के मुद्दे को लेकर संसद के बजट सत्र के दूसरे हिस्से का पहला दिन सोमवार को दोनों सदनों के लिए काफी हंगामेदार रहा। राज्यसभा की कार्यवाही जहां इस मुद्दे पर हंगामे की भेंट चढ़ गई, वहीं लोकसभा में इसी मुद्दे पर प्रश्नकाल बेहद हंगामेदार रहा।

कांग्रेस के सदस्यों ने दोनों ही सदनों में उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन के मुद्दे को उठाया और हंगामा किया। उन्होंने केंद्र सरकार व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगाए।

संसद के बजट सत्र के दूसरे हिस्से के पहले दिन कार्यवाही शुरू होने से कुछ मिनट पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उम्मीद जताई कि इस सत्र के दौरान कार्यवाही सुचारू रूप से चलेगी।

संसद परिसर में मोदी ने संवाददाताओं से कहा, “पिछले सत्र में भी हमने कई विधेयकों को मंजूरी दी। उनमें से ज्यादातर वित्तीय मामलों से संबंधित थे। मैं उम्मीद करता हूं कि पिछले बार की तरह इस बार भी कार्यवाही सुचारू रूप से चलेगी। हम आशा करते हैं कि सत्र को सफल बनाने में सभी (पार्टियां) सहयोग करेंगी।”

लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस सदस्यों ने उत्तराखंड का मुद्दा उठाया और प्रश्नकाल स्थगित करने की मांग की। हालांकि लोकसभा अध्यक्ष ने इससे इनकार कर दिया।

कांग्रेस सदस्य इसके बाद अध्यक्ष की आसंदी तक पहुंच गए। वे ‘लोकतंत्र की हत्या बंद करो’ और ‘लोकतंत्र की हत्या नहीं होने देंगे’ जैसे नारे लगा रहे थे।

सदन में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए प्रश्नकाल स्थगित करने का नोटिस दिया।

आम आदमी पार्टी (आप) के नेता भगवंत मान ने भी पंजाब में किसानों की आत्महत्या और महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति पर स्थगन का नोटिस दिया।

लोकसभा में हालांकि सिख गुरुद्वारा (संशोधन) विधेयक, 2016 पारित हो गया। सदन ने एकमत से इसे मंजूरी दी। इसके पहले शिरोमणि अकाली दल, आप व कांग्रेस के बीच गरमागरम बहस हुई।

संशोधन विधेयक के मुताबिक, मतदान के लिए पंजीकृत 21 वर्ष से ऊपर के प्रत्येक सिख को सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) तथा विभिन्न गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के चुनाव में मत देने का अधिकार होगा।

वैसे लोग जो दाढ़ी या बाल कटवाते हैं, वे मतदान में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।

राज्यसभा में इस विधेयक को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने 15 मार्च को पेश किया था, जिसे अगले ही दिन राज्यसभा ने पारित कर दिया था।

वहीं, लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सहित कई अन्य पार्टियों के सदस्यों ने चीनी उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाने की मांग की, क्योंकि इससे भारत की छोटी व मध्य आकार के व्यवसायों को नुकसान हो रहा है।

वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि किसी भी देश के उत्पाद पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध विश्व व्यापार संगठन के मापदंडों के अनुसार संभव नहीं है। उन्होंने हालांकि सदस्यों को इस बात से आश्वस्त किया कि भारतीय विनिर्माताओं तथा उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं।

उधर, राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही सदन में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार पर संसद सत्र से ठीक पहले ऐसा माहौल बनाने का आरोप लगाया, जिससे संसद की कार्यवाही में बाधा उत्पन्न हो।

इस पर केंद्रीय संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि मामला फिलहाल अदालत में है, इसलिए इस पर टिपप्णी नहीं की जा सकती।

विपक्ष ने हालांकि इससे असहमति जताई। कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा, “हम इस पर चर्चा करेंगे और आपको बेनकाब करेंगे।”

इस पर सदन के नेता व केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा होगी, पर फिलहाल नहीं।

इसके बाद विपक्षी सदस्य सभापति के आसन के समक्ष पहुंच गए और उन्होंने नारेबाजी शुरू कर दी। हंगामे को देखते हुए सदन की कार्यवाही अपराह्न् दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

इसके तुरंत बाद कांग्रेस के सदस्य सरकार के खिलाफ नारे लगाने लगे, जिसके बाद सदन की कार्यवाही अपराह्न तीन बजे तक लिए और फिर पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई।

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