नई दिल्ली, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्र सरकार की भूमि अधिग्रहण नीति, बहु ब्रांड रिटेल में एफडीआई, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने की संभावना तथा कृषि संबंधी ‘ग्रीन चैनलिंग’ नीति और नियामक सुधारों की बदौलत खाद्य आपूर्ति श्रंखला में भारत-ब्रिटेन सयोग व निवेश आगे बढ़ा है। यह बात यहां एक रिपोर्ट में कही गई है।
यह रिपोर्ट खाद्य आपूर्ति श्रंखला में भारत-ब्रिटेन सहयोग व निवेश अवसरों और चिंताओं पर गुरुवार को दोनों देशों के नीति निर्माताओं, विशेषज्ञों और औद्योगिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी में की गई। रिपोर्ट डी एंड बी तनग्राम ने तैयार किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, व्यापार में सुधार के लिए नीति और नियामकीय सुधार जरूरी हैं। कृषि-उत्पाद के लिए ‘ग्रीन चैनलिंग’ लागू करने से सरकारी नीतियों में पारदर्शिता बढ़ेगी। राष्ट्रीय मार्ग तथा राजमार्ग पर ईंधन स्टेशनों में ट्रक डॉकिंग स्टेशन बनाने की जरूरत है।
डी एंड बी तनग्राम के साझेदार दीपांकर डे ने कहा, “लॉजिस्टिक और आपूर्ति श्रंखला देश की प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित कर रहा है, जिससे लागत वृद्धि, देरी, व्यापारिक गतिविधि में कटौती और वैश्विक मूल्य श्रंखला प्रभावित होती है।”
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि खाद्य आपूर्ति श्रंखला में संभावनाओं की तलाश करना तथा कुशलता बढ़ाना भारत सरकार की प्राथमिकता है।
ब्रिटेन के प्रतिनिधियों ने कहा कि यूरोपीय बाजार बिखर रहे हैं और भारत तेजी से बढ़ता बाजार है। इस क्षेत्र में निवेश से उन्हें वैश्विक उपस्थिति बढ़ाने में मदद मिलेगी।
अध्ययन में खाद्य आपूर्ति श्रंखला के पांच क्षेत्रों -भंडारण, गोदाम, शीत भंडार, पैकेजिंग प्रौद्योगिकी, कौशल का विकास तथा अनुसंधान व विकास- पर प्रमुखता से ध्यान दिया गया है।
रिपोर्ट की एक लेखक और आईसीआरआईईआर की प्रोफेसर अर्पिता मुखर्जी ने कहा कि संयुक्त प्रयास से कौशल विकास करना ब्रिटेन की कंपनियों के सहयोग के लिए महत्वपूर्ण कारक रहेगा तथा आरएंडडी पर भी फोकस करने की जरूरत है।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि यदि जीएसटी लागू नहीं हो पाता है, तो केंद्र सरकार राज्य सरकार के साथ ग्रीन चैनल पर काम कर सकती है।
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