जमात प्रमुख के मृत्युदंड के विरोध में बांग्लादेश बंद

ढाका, 8 मई (आईएएनएस)। बांग्लादेश में जमात-ए- इस्लामी के आह्वान पर दो दिवसीय देशव्यापी बंद रविवार को शुरू हो गया। जमात ने 1971 के युद्ध अपराधों के लिए पार्टी प्रमुख के मृत्युदंड को बरकार रखने के सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले के विरोध में बंद का आह्वान किया है।

शीर्ष अदालत में पार्टी अध्यक्ष मतिउर रहमान निजामी की पुनर्विचार याचिका गुरुवार को खारिज होने के कुछ घंटे बाद जमात ने 48 घंटे के देशव्यापी बंद का आह्वान किया था।

निजामी 2000 से पार्टी अध्यक्ष हैं और अब उनकी संभावित फांसी रोकने के लिए उनके पास केवल राष्ट्रपति से दया की अपील करने का ही विकल्प बच गया है।

बंद के बावजूद ढाका और उसके आसपास यातायात करीब-करीब सामान्य बना हुआ है। बांग्लादेश के अन्य भागों में भी लोगों के दैनिक जीवन पर बंद का कोई असर नहीं पड़ा है।

ढाका और देश के अन्य भागों में दुकानें और व्यवसायिक प्रतिष्ठान अन्य दिनों की तरह रविवार को भी खुले रहे।

निजामी (72) 2001-2007 के दौरान खालिदा जिया के मंत्रिमंडल में कृषि और उद्योग मंत्री रह चुके हैं।

निजामी की पार्टी ने कहा कि उन्हें न्याय नहीं मिला, जबकि सरकार का कहना है कि मामले की सुनवाई उचित मानक के अनुरूप हुई।

निजामी जमात के उन बड़े नेताओं में हैं, जिन पर दो युद्ध अपराध न्यायाधिकरणों में मुकदमा चलाया गया है।

इन न्यायाधिकरणों का गठन प्रधानमंत्री शेख हसीना की बांग्लादेश अवामी लीग के नेतृत्व वाली सरकार ने 1971 के युद्ध अपराधियों पर मुकदमा चलाने के लिए 2010 में किया था।

हत्या, आगजनी, दुष्कर्म और लोगों को जबरन मुसलमान बनाने सहित मानवता के खिलाफ अपराधों के 16 आरोपों में निजामी को 2012 में दोषी पाया गया था।

अभियोग आदेश में कहा गया है कि निजामी अल-बद्र के मुख्य संगठनकर्ता थे। अल-बद्र पाकिस्तानी सेना का एक सहयोगी संगठन था, जिसने बंगमुक्ति युद्ध के दौरान बंगाली बुद्धिजीवियों की हत्या की साजिश रची थी और उसे अंजाम दिया था। का काम करता था। इस युद्ध के परिणामस्वरूप पूर्वी पाकिस्तान एक स्वतंत्र राष्ट्र बांग्लादेश के रूप में अस्तित्व में आया था।

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