गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार को केन्या के एक अधिकारी ने कहा था कि सरकार ने निर्णय लिया है कि शरणार्थियों को आश्रय देना बंद करना होगा और दादाब व काकुमा शरणार्थी शिविर बंद किए जाएंगे
राजधानी नैरोबी में जारी एक बयान में यूएनएचसीआर ने केन्या की सरकार से अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने और ऐसा कोई भी कदम उठाने की अपील की, जिससे जरूरतमंद लोगों के प्रति उसके अंतर्राष्ट्रीय कर्तव्यों में बाधा उत्पन्न हो।
पूर्वोतरी केन्या में स्थित दादाब शरणार्थी शिविर 20 साल पहले बनाया गया था। यह दुनिया का सबसे बड़ा शरणार्थी शिविर है, जहां करीब 3,30,000 शरणार्थी रहते हैं। इनमें से अधिकतर सोमालिया से हैं।
वहीं पश्चिमोत्तर में स्थित काकुमा शरणार्थी शिविर में 1,50,000 शरणार्थी रहते हैं, जिनमें से ज्यादातर सूडान, दक्षिणी सूडान और सोमालिया से हैं।
केन्या के गृह मंत्रालय के मुख्य सचिव करंजा किबिचो ने शुक्रवार को आर्थिक, सुरक्षा और पर्यावरण के बढ़ते बोझ का हवाला देते हुए कहा था कि सरकार जल्द ही अपने शरणार्थी शिविरों को बंद कर देगी।
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