उज्जैन, 11 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ के दौरान बुधवार को भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित सामाजिक समरसता कार्यक्रम एन वक्त पर संत समागम में बदल गया। इस आयोजन में पहुंचे पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने संतों के साथ क्षिप्रा नदी के वाल्मीकि घाट पर डुबकी लगाई और सहभोज भी किया।
भाजपा ने पूर्व में दलित संतों के साथ सामाजिक समरसता का कार्यक्रम आयोजित करने का ऐलान किया था, जिसका कई संतों और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े लोगों ने विरोध भी किया। यही कारण रहा कि पार्टी अध्यक्ष के पहुंचने से पहले संगठन से जुड़े लोगों ने रणनीति बदली और आयोजन का संतों का समागम बना दिया। यही कारण रहा कि वाल्मीकि धाम में वाल्मीकि, रैदास, बलाई, कबीर पंथ समाज के संतों सहित सभी अखाड़ों के प्रतिनिधि और संत एक मंच पर नजर आए।
वाल्मीकि धाम में अमित शाह ने दलित समुदाय के महान संत स्वामी सोहनदास जी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने मंच पर मौजूद संतों का आशीर्वाद प्राप्त कर उनका माला पहनाकर और शाल एवं श्रीफल देकर सम्मान किया। उसके बाद उन्होंने कहा, “आज जगदगुरु शंकराचार्य की जयंती होने से अत्यंत पवित्र दिन है। इस सुअवसर पर सामाजिक समरसता के पवित्र उद्देश्य को लेकर आयोजित इस संत-समागम से देश भर में सकारात्मक संदेश जाएगा।”
शाह ने कहा, “एक समय जब सनातन धर्म 80 परंपराओं में छिन्न-भिन्न था। साथ ही आध्यात्मिक चिंतन के स्थान पर कर्म-कांडों का बोल-बाला था, ऐसे कालखंड में केवल 32 वर्ष की आयु में एक महान ऋषि आद्य शंकराचार्य ने देश की परिक्रमा कर आध्यात्मिक चिंतन को पुनस्र्थापित किया। आद्य शंकराचार्य ने तीर्थो का भी उद्घार किया। उन्होंने पंच-पूजा की स्थापना कर देशवासियों को आध्यात्मिक मार्ग-दर्शन दिया।”
उन्होंने सिंहस्थ को ईश्वर निर्मित व्यवस्था की संज्ञा देते हुए कहा कि सिंहस्थ का आयोजन प्रबंधन के विद्यार्थियों के लिए भी आश्चर्य व शोध का विषय है। यह एक ऐसा मेला है, जिसमें बिना निमंत्रण के करोड़ों लोग खिंचे चले आते हैं। कुंभ वह मौका है जब देश ही नहीं दुनिया के संत एक स्थान पर एकत्रित होते हैं और श्रद्घालुओं को उनके पूजन अर्चन करते हैं।
इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से सभी संत-महात्माओं व श्रद्घालुओं का नमन भी किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी संबोधित किया।
वाल्मीकि आश्रम के संस्थापक बाल योगी उमेशनाथ महाराज ने इस अवसर पर कहा कि भगवान वाल्मीकि की कृति सबको आदर-सम्मान व प्रेम का संदेश देती है। राम ने त्रेता युग में समरसता का भाव जगाया। वाल्मीकि कृत रामायण में उल्लेख है कि भगवान राम ने दलित केवट व निषाद को गले लगाया, वहीं सबरी के जूठे बेर खाए और वानर राज को गले लगाया।
स्वामी उमेशनाथ ने कहा कि जातिपंथ और भेद-भाव तोड़कर देश को जोड़ने के लिए समरसता का संदेश देना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह द्वारा इस दिशा में साहस के साथ की गई पहल की सराहना की।
स्वामी उमेशनाथ ने कहा कि संत विभिन्न जातियों में जन्म जरूर लेते हैं, मगर संत की कोई जाति नहीं होती। संतों का दायित्व है कि वे भी राष्ट्र निर्माण के लिए मन-क्रम व वचन से सार्थक प्रयास करें। जब राष्ट्र रहेगा तभी संत समाज भी रहेगा। इसलिए संत समाज मिलजुलकर एकात्मतता का भाव प्रकट करें।
ज्ञात हो कि भाजपा ने दलित संतों के साथ स्नान और सहभोज के सामाजिक समरसता कार्यक्रम का एलान किया था, इसका विभिन्न संतों ने विरोध किया था। उनका आरोप था कि इस आयोजन के जरिए साधु-संतों को जाति के आधार पर बंटवारे की कोशिश की गई है। यही कारण है कि अंतिम समय में भाजपा ने बड़ा बदलाव किया। यह कार्यक्रम वाल्मीकि धाम में हो रहा है।
पहले सामाजिक समरसता कार्यक्रम का विरोध और फिर संत समागम में हिस्सा लेने के सवाल पर संवाददाताओं से अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी ने कहा कि पहले उनका विरोध था, क्योंकि संतों की कोई जाति नहीं होती है, मगर तब इस आयोजन को दलित संतों का आयोजन बनाया गया था, अब ऐसा नहीं है, इसीलिए सभी संत एक मंच पर आए हैं।
भाजपा के इस समागम के मंच और सहभोज में महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरी, सत्यमित्रनंद, नरेंद्र गिरी, हरि गिरी, सहित अनेक अखाड़ों के संत आदि मौजूद रहे।
भाजपा अध्यक्ष शाह बुधवार को साढ़े नौ बजे नियमित उड़ान से देवी अहिल्याबाई होल्कर अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट इंदौर पहुंचे जहां उनका प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान, महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के अलावा अन्य नेताओं ने अगवानी की। वे यहां से उज्जैन के लिए रवाना हुए।
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