सिलिकोसिस मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के खिलाफ वारंट

भोपाल/नई दिल्ली 11 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश से पलायन कर गुजरात के विभिन्न उद्योगों में काम करते हुए सिलिकोसिस से ग्रस्त हुए लोगों की मौत पर मुआवजा व बीमारों के पुनर्वास को लेकर दायर मामले की सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने प्रदूषण नियत्रंण बोर्ड (सीपीसीबी) के चेयरमैन के खिलाफ बुधवार को जमानती वारंट जारी किया।

सिलिकोसिस पीड़ित संघ झाबुआ और नई शुरुवात संगठन इंदौर की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन को फैक्ट्रियों की स्थिति के बारे में वर्ष 2006 में दी गई रपट पर अपना जवाब स्वयं उपस्थित होकर देने के निर्देश दिए थे। सर्वोच्च न्यायालय के नोटिस के बावजूद बोर्ड के चेयरमैन बुधवार की सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए, जिस पर न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन की पीठ ने बोर्ड चेयरमैन के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया।

बयान के अनुसार, वर्ष 2006 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एक रपट जारी की थी, जिसमें गोधरा, गुजरात में स्थित क्वाट्र्ज उद्योगों से प्रदूषण के कारण सिलिकोसिस और न्यूमोनोकोसिस जैसे रोगों के प्रसार की जानकारी दी गई थी। जो न्यायालय के समक्ष याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत की गई थी। हाल ही में याचिकाकर्ता द्वारा न्यायालय के समक्ष एक आवेदन प्रस्तुत किया गया था, जिसमें मांग की गई थी कि वर्ष 2006 की रपट में की गई अनुशंसाओं के पालन की निगरानी बोर्ड द्वारा की जाए।

बयान में कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय ने चार मई, 2016 को सिलिकोसिस मामले में फैसला देते हुए बीमारी से मृत लोगों के निकट संबंधियों को तीन-तीन लाख रुपये मुआवजा तथा 304 पीड़ितों के पुर्नवास के आदेश क्रमश: गुजरात एवं मध्य प्रदेश सरकार को दिए थे। इसके साथ ही केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन को स्वयं उपस्थित होकर गुजरात के गोधरा, बालासिन्नौर आदि शहरों में चल रही फैक्ट्रियों के संबंध में जवाब प्रस्तुत करने के आदेश दिए थे।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की ओर से मामले की पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारीख ने कहा कि सिलिकोसिस मामले में आयोग द्वारा इससे बचाव, निदान, पुनर्वास एवं मुआवजे के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों के पालन के लिए बाध्य होना चाहिए।

याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता अमी शुक्ला ने न्यायालय का ध्यान सीपीसीबी के चेयरमैन की अनुपस्थिति की ओर आकर्षित किया।

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