सुशील की डब्ल्यूएफआई के साथ बैठक विफल

नई दिल्ली, 18 मई (आईएएनएस)। दो बार के ओलम्पिक पदक विजेता पहलवान सुशील कुमार का इस साल अगस्त में होने वाले रियो ओलम्पिक में खेलने का सपना अभी तक अधर में लटका हुआ है। सुशील की बुधवार को भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के साथ ओलम्पिक के लिए ट्रायल कराने को लेकर हुई बैठक असफल रही।

नई दिल्ली, 18 मई (आईएएनएस)। दो बार के ओलम्पिक पदक विजेता पहलवान सुशील कुमार का इस साल अगस्त में होने वाले रियो ओलम्पिक में खेलने का सपना अभी तक अधर में लटका हुआ है। सुशील की बुधवार को भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के साथ ओलम्पिक के लिए ट्रायल कराने को लेकर हुई बैठक असफल रही।

सुशील ने अपने कोच सतपाल के साथ डब्ल्यूएफआई के अध्यक्ष ब्रज भूषण शरण सिंह के सामने 74 किलो ग्राम वर्ग में ट्रायल कराए जाने को लेकर अपना पक्ष रखा। इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने सुशील को राष्ट्रीय शिविर में हिस्सा लेने से 27 मई को होने वाली अगली सुनवाई तक के लिए प्रतिबंधित कर दिया है।

सिंह ने बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा, “हमारे मानने का सवाल ही नहीं उठता। हमने उनकी बात सुनी और अब हम उच्च न्यायालय के सामने अपनी बात रखेंगे। इस मामले पर उन्हें फैसला लेने दें।”

उन्होंने कहा, “उच्च न्यायालय में 27 मई को होने वाली अगली सुनवाई तक हम सुशील को शिविर में हिस्सा नहीं लेने देंगे।”

यह बैठक उच्च न्यायालय के डब्ल्यूएफआई को सुशील के साथ बात करने के आदेश के बाद हुई है।

सुशील के रियो ओलिम्पक में भाग लेने के सपने को तब बड़ा झटका लगा था जब मुंबई के रहने वाले नरसिंह यादव ने 74 किलोग्रम वर्ग में पिछले साल नंबवर में विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य पदक हासिल कर ओलम्पिक कोटा दिलाया था।

सुशील ने बैठक के बाद कहा, “मुझे पूरे देश से समर्थन मिल रहा है। अमेरिका, आस्ट्रेलिया, कनाडा के लोग भी मेरे समर्थन में हैं। हर कोई यही कह रहा है कि पूरा देश मेरे साथ है।”

उन्होंने कहा, “मुझे करियर की शुरुआत से ही महासंघ की तरफ से प्रशिक्षण और मौका मिला है। उन्होंने हमेशा मेरा साथ दिया है। नरसिंह मेरे भाई जैसा है, दुर्भाग्यवश मुझे उसके खिलाफ ट्रायल में लड़ना पड़ेगा।”

सुशील ने 2008 बीजिंग ओलम्पिक में 66 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक हासिल किया था। इसके बाद 2012 लंदन ओलम्पिक में उन्होंने 66 किलोग्राम वर्ग रजत पदक हासिल किया था, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय कुश्ती महासंघ (एफआईएलए) ने 2014 में इसे समाप्त कर दिया था।

इसी कारण उन्हें 74 किलोग्राम वर्ग में आना पड़ा, जहां नरसिंह भारत के इकलौते और भारत के नम्बर-1 पहलवान हैं।

सुशील कंधे की चोट के कारण ओलम्पिक क्वालीफायर में हिस्सा नहीं ले पाए थे और नरसिंह ने भारत को ओलम्पिक कोटा दिलाया था।

बार-बार भारतीय कुश्ती महासंघ से न सुनने के बाद सुशील ने अब अदालत का दरवाजा खटखटाया।

इससे पहले मंगलवार को उच्च न्यायालय ने डब्ल्यूएफआई से सुशील के साथ मामले को सुलझाने की बात कही थी।

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