हेरात (अफगानिस्तान), 4 जून (आईएएनएस)। भारत का अफगानिस्तान के विकास में सहायता शनिवार को एक नए स्तर तक पहुंच गया। यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने शनिवार को संयुक्त रूप से बटन दबाकर जग मार्ग के दरवाजों को खोला। इस बड़े बांध का निर्माण 1700 करोड़ रुपये की लागत से भारत ने किया है।
मोदी शनिवार को यहां पहुंचे, उन्होंने दोहराया कि भारत अफगानिस्तान के विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
इस अवसर पर राष्ट्रपति गनी ने मोदी को अफगानिस्तान के सर्वोच्च सम्मान अमीर अमिनुल्ला खार पुरस्कार से भी नवाजा।
अफगान-भारत मैत्री बांध को पूर्व में सलमा बांध के नाम से जाना जाता था।
बांध के उद्घाटन के बाद मोदी ने कहा, “अफगानिस्तान की सफलता हर भारतीय की इच्छा और आशा है। यह देश के लिए हमारे दिल में बसे प्यार और प्रशंसा के कारण है।”
मोदी ने कहा, “हम चाहते हैं कि आपके लोकतंत्र की जड़ें मजबूत हों, लोगों में एकता हो और आपकी अर्थव्यवस्था आगे बढ़े।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका दौरा केवल अफगानिस्तान के खेतों की सिंचाई करने वाले और घरों में रोशनी देने वाले हेरात में बांध का उद्घाटन करने के लिए नहीं था।
उन्होंने कहा, “हम एक क्षेत्र को पुनर्जीवित करने, जीवन का नवीकरण करने, आशा बहाल करने और अफगानिस्तान के भविष्य को पुनर्परिभाषित करने का काम कर रहे हैं।”
मोदी ने कहा कि इस बांध से न केवल बिजली उत्पन्न होगी, बल्कि अफगानिस्तान की भविष्य में उम्मीद बहाल होगी, जीवन का नवीनीकरण होगा और अफगानिस्तान का भविष्य नए सिरे से परिभाषित होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बांध से न केवल पश्चिमी अफगानिस्तान के हेरात प्रांत के चिस्ती, ओबे, पश्तून जार्गहुन, कारोख, गोजारा, इंजिल, जिंदजान, कोशान और घोर्यान क्षेत्रों के 640 गांवों के खेतों में सिंचाई होगी, बल्कि 250,000 घरों में बिजली भी मिलेगी।
मोदी ने कहा, “इस बांध का निर्माण केवल ईंटों और गारों से नहीं हुआ है, बल्कि अफगानिस्तान और भारत के नागरिकों की बहादुरी और हमारी दोस्ती के विश्वास से हुआ है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि गर्व के इस पल में हम उन लोगों के प्रति आभार प्रकट करना चाहते हैं, जिन्होंने अफगानिस्तान के लोगों के उज्जवल भविष्य के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया।
मोदी ने कहा कि भारत ने अफगानिस्तान में स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण और ग्रामीण समुदायों के लिए सिंचाई की सुविधा के लिए उसके साथ साझेदारी की है।
उन्होंने कहा कि इस साझेदारी से महिलाओं को कौशल और युवाओं को शिक्षा के साथ सशक्त किया जाएगा।
मोदी ने कहा, “हमने सड़कों के निर्माण के लिए भी हाथ मिलाया है, ताकि जरंज से देलाराम तक आपके देश के बीच की दूरी पाटी जा सके और आपके घरों तक बिजली पहुंचे।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि ईरान के प्रांत चाबहार में भारत के निवेश से अफगानिस्तान के लिए एक नया मार्ग प्रशस्त होगा।
पिछले माह भारत, ईरान और अफगानिस्तान ने तेहरान में एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत व्यापार और पारगमन के लिए ओमान में चाबहार बंदरगाह का विकास किया जाएगा। मोदी ने कहा कि ईरान के चाबहार बंदरगाह में भारत के निवेश से अफगानिस्तान को दुनिया के लिए एक नया मार्ग एवं समृद्धि का नया रास्ता मिलेगा।
मोदी ने कहा, “हमारी मित्रता का फल काबुल, कंधार, मजार और हेरात तक सीमित नहीं है और न ही होगा। हमारी साझेदारी अफगानिस्तान के हर हिस्से तक पहुंचेगी और देश के समाज के हर हिस्से को लाभ पहुंचाएगी।”
राष्ट्रपति गनी ने उद्घाटन समारोह में मोदी का स्वागत करते हुए अफगानिस्तान को उनका दूसरा घर करार दिया। साथ ही कहा कि भारत की मदद से अफगानिस्तान का 40 साल पुराना सपना हकीकत में बदला।
उन्होंने कहा, “हमारी जनता भारत की पहचान सड़कों, बांधों और 200 से अधिक विकास की छोटी परियोजनाओं से पहचानती है।”
मूलरूप से 1976 में हरी नदी पर निर्मित इस बांध को अफगानिस्तान में हुए गृह युद्ध के दौरान काफी क्षति पहुंची थी। इस का पुनर्निर्माण भारत और अफगानिस्तान के इंजीनियरों द्वारा 1,700 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है।
यह बांध अफगानिस्तान के विकास कार्य के लिए भारत के समर्थन का प्रतीक है।
पिछले वर्ष दिसंबर में मोदी और गनी ने भारत की सहायता से काबुल में निर्मित अफगानिस्तान संसद के नए भवन का उद्घाटन किया था।
मोदी शनिवार को अपनी पांच देशों की यात्रा के पहले पड़ाव के तहत अफगानिस्तान पहुंचे।
मोदी दोपहर बाद अपनी यात्रा के दूसरे पड़ाव दोहा और कतर के लिए रवाना हो गए। इसके बाद उन्हें स्विट्जरलैंड, अमेरिका और मेक्सिको भी जाना है।
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