शूटआउट विवाद ने चैम्पियंस ट्रॉफी का मजा किरकिरा किया

लंदन, 18 जून (आईएएनएस)। चैम्पियंस ट्ऱॉफी के फाइनल में शुक्रवार देर रात पेनाल्टी शूटआउट में भारतीय टीम के विरोध के बाद काफी विवाद देखने को मिला। भारतीय टीम को इस मैच में आस्ट्रेलिया से 1-3 से हार मिली और टीम रजत पदक हासिल कर पाई।

दोनों टीमों के बीच हुए मैच में 60 मिनट में एक भी गोल नहीं हुआ था, जिसके बाद मैच का फैसला पेनाल्टी शूटआउट से निकाला गया।

शूटआउट में उस समय विवाद खड़ा हो गया जब भारत ने आस्ट्रेलिया के खिलाड़ी डेनिएल बील के गोल के खिलाफ अपील की। डेनिएल को तय समय 14 सेकेंड के बाद भी शॉट खेलने का मौका दिया गया, जिसे उन्होंने गोल में बदला।

टूर्नामेंट की ज्यूरी उस समय मुसीबत में पढ़ गई जब भारत ने वीडियो अंपायर के शूटआउट के दूसरे प्रयास को दोबारा देखने के फैसले के खिलाफ अपील की।

ज्यूरी ने इस स्थिति से निकलने के लिए कई बार रिप्ले देखा। मैच के खत्म होने के डेढ़ घंटे बाद जूरी ने फैसला लिया की गेंद भारतीय गोलकीपर पी.आर. श्रीजेश के पैड के बीच में से कुछ सेकेंड के लिए गुजरी थी। जूरी ने शूटआउट के रिटेक के लिए यह कारण दिया और आस्ट्रेलिया को विजेता घोषित कर दिया।

इससे पहले 60 मिनट का मैच गोलरहित रहने के बाद आस्ट्रेलिया के गोलकीपर टेलर लोवेल ने भारत के एस.के.उथप्पा, एस.वी. सुनील और सुरेन्द्र कुमार के शॉट रोक भारत को जीत से वंचित रखा। भारतीय टीम की तरफ से हरमनप्रीत सिंह ही एकमात्र गोल कर पाए।

आस्ट्रेलिया की तरफ से अरान ज्लाव्सकी, डेनिएल, सिमोन ओचार्ड गोल करने में कामयाब रहे। श्रीजेश सिर्फ ट्रेंट मिटन का शॉट रोकने में ही कामयाब रहे थे।

हालांकि चैम्पियंस ट्रॉफी के इतिहास में भारत का यह सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। भारत ने इस साल पहली बार रजत पदक हासिल किया है। इससे पहले 1982 में भारतीय टीम कांस्य पदक अपने नाम कर पाई थी।

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