बोक-डोंग किम ने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार परिषद (एचआरसी) के एक समारोह में यहां कहा, “मैं जापानी यौन दासता की पीड़ित हूं। मैं आपको अपने अनुभव और मांग से अवगत कराना चाहती थी और आपका सहयोग मांगने के लिए मैं यहां आई थी, क्योंकि मेरा देश कमजोर है।”
उन्होंने कहा, “हमने अपनी मांगों से लोगों को अवगत कराने का प्रयास किया। मैं नहीं जानती यह समझौता कैसे हुआ, लेकिन कोरिया सरकार ने इसपर न तो हमसे और न ही कोरियाई परिषद से बातचीत की।”
सन् 1932 की शुरुआत में जापानी सेना ने कोरियाई प्रायद्वीप की हजारों लड़कियों व महिलाओं को यौन दासी बनाया, इसके अलावा उन्होंने चीन, फिलीपींस, म्यांमार, इंडोनेशिया व नीदरलैंड की महिलाओं को भी यौन दासी बनाया।
dharmpath.com dharmpath