जेनेवा, 20 जून (आईएएनएस)। पिछले वर्ष यानी वर्ष 2015 के अंत तक 6.5 करोड़ से अधिक लोग जबरन विस्थापित किए गए, जबकि उसके पहले के 12 महीनों में यह आंकड़ा 5.95 करोड़ थी। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) की सोमवार को जारी विज्ञप्ति में यह बात कही गई है।
समाचार एजेंसी एफे के अनुसार, इन शरणार्थियों की शरण देने वाले शीर्ष देशों में तुर्की (25 लाख), पाकिस्तान (16 लाख), लेबनान(11 लाख), ईरान(949,400), इथोपिया (73,06,100) और जार्डन (664,000 हजार) शामिल हैं।
जिन देशों से सबसे अधिक लोग निकले, उनमें सीरिया(49 लाख), अफगानिस्तान (27 लाख) और सोमालिया (11 लाख) शामिल हैं। आंतरिक विस्थापन के मामले में कोलंबिया 69 लाख के साथ पहले, 66 लाख के साथ सीरिया दूसरे और 44 लाख विस्थापन के साथ इराक तीसरे स्थान पर है।
तुर्की में सर्वाधिक शरणार्थी पहुंचे, जबकि लेबनान के हिस्से प्रति हजार निवासियों पर 183 शरणार्थी आए।
वर्ष 2015 में औद्योगिकृत देशों में शरण मांगने वाले नए लोगों की संख्या 20 लाख तक पहुंच गई। इस तरह ऐसे लोगों की कुल संख्या 32 लाख हो गई है।
सबसे अधिक 4 लाख 41 हजार लोगों ने जर्मनी में शरण मांगी है, एक लाख 72 हजार लोगों ने अमेरिका में शरण मांगी है और वह इस मामले में दूसरे स्थान पर है।
यूएनएचसीआर के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के शरणार्थियों में 51 फीसदी बच्चे हैं। उनमें से बहुत सारे ने अपना देश अकेले ही छोड़ा है। शरण मांगने वालों में करीब एक लाख बच्चे ऐसे हैं, जो अपने परिवार से बिछड़ गए हैं।
जबरन विस्थापित किए गए लोगों के लिए समाधान बहुत अपर्याप्त है। पिछले साल केवल दो लाख एक हजार शरणार्थी ही अपने देश लौटे। उनमें मुख्य रूप से अफगानिस्तान, सूडान और सोमालिया के थे।
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