नई दिल्ली, 23 जून (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को बृहन्मुंबई नगर निगम (जीएमएमसी) को सेंट थॉमस हाईस्कूल की एक अनाधिकृत और असुरक्षित इमारत को गिराने से मना करने से इनकार कर दिया।
अदालत ने इस बात पर हैरानी जताई कि असुरक्षित इमारत में 3,100 विद्यार्थियों वाले स्कूल का संचालन करने की इजाजत कैसे दे दी गई।
न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर की अवकाशकालीन पीठ ने स्कूल को थोड़े समय के लिए भी राहत देने से इनकार करते हुए कहा, “हम हैरान हैं कि (स्कूल की इमारत की) डिजाइन की पुष्टि किए बिना स्कूल के संचालन की इजाजत कैसे दी गई, जो कि वैधानिक रूप से जरूरी है।”
दहिसर (पूर्व) में स्थित सेंट थॉमस हाईस्कूल ने अपने वर्तमान परिसर को स्थानांतरित करने के लिए एक साल का समय मांगा था, ताकि कोई अस्थायी इंतजाम किया जा सके।
पीठ ने स्कूल को दो हफ्ते की भी राहत देने से इनकार करते हुए कहा, “इमारत को ढहाने के लिए एक ही मानसून काफी होगा।”
न्यायमूर्ति खानविलकर ने वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी को मुंबई में होने वाली मानसून की बारिश के प्रकोप के बारे में याद दिलाते हुए स्कूल को तत्काल स्थानांतरित करने का आदेश दिया।
न्यायमूर्ति खानविलकर ने कहा, “आप स्कूल को किसी अन्य इमारत में खुद ही तत्काल स्थानांतरित करें।”
सेंट थॉमस स्कूल ने स्कूल की इमारत को गिराने के बंबई उच्च न्यायालय के आठ जून 2016 के आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
बृहन्मुंबई नगर निगम ने 2013 में स्कूल की इमारत को अनाधिकृत घोषित कर दिया था।
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