लंदन, 4 जुलाई (आईएएनएस)। ब्रिटिश सरकार ने शरिया कानून की इस लिहाज से समीक्षा करने के लिए एक समिति गठित की है कि यह इंग्लैंड और वेल्स के कानून के अनुकूल है या नहीं।
विशेषज्ञों की समिति को शरिया कानून का अनुभव रखने वाले व्यक्तियों से यह पूछने के लिए अधिकृत किया गया है कि वे तय करें कि इस धार्मिक कानून का देश में दुरुपयोग तो नहीं हो रहा।
समिति यह भी देखेगी कि शरीयत का उपयोग कुछ समूहों के खिलाफ पक्षपात करने, साझा मूल्यों को कमजोर करने या सामाजिक नुकसान पहुंचाने के लिए तो नहीं किया जा रहा।
समिति की अध्यक्ष मोना सिद्दिकी ने कहा, “यह जरूरी है कि समिति देशभर के विभिन्न सूत्रों के विचार और अनुभव जाने। इसलिए मैं इस प्रकार की समितियों में काम करने वालों या जिन्होंने शरिया समितियों की सहायता ली हे, उन्हें आमंत्रित करती हूं कि वे आगे आएं और अपने विचार साझा करें।”
सिद्दिकी इस्लामी और अंतर-धार्मिक विषयों की विशेषज्ञ हैं।
सिद्दिकी के मुताबिक, समिति उन लोगों से बात करने को उत्सुक है, जिन्होंने पिछले पांच सालों में किसी शरिया समिति में काम किया है और पिछले पांच सालों में किसी भी संदर्भ में शरिया समिति का इस्तेमाल किया है।
संभावना है कि समिति 2017 तक अपना काम पूरा कर लेगी।
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