खुद को और अपनी क्षमताओं को जानें: सुधांशु जी महाराज

sudhanshuji_maharajजीवन यात्रा है और सब से सुन्दर मांगलिक यात्रा है। जिन्दगी भर व्यक्ति भीड़ के पीछे भागता रहता है और एक दिन जीवन यात्रा समाप्त हो जाती है। जरा सोचिए इस जीवन यात्रा में, क्या पाया-क्या खोया? कौन अपना- कौन पराया? क्या कर रहे हैं-कहां जा रहे हैं? क्या जोड़ा और क्या साथ जाएगा? जिन्दगी में जिम्मेदारियां निभाएं, लेकिन जीवन का महत्व भी समझें।

भेड़-बकरियों की तरह जीवन न जीएं, जीवन जीने की कला भी सीखें। व्यक्ति का स्वभाव बदला जा सकता है, क्षमताएं विकसित की जा सकती हैं। आयु आपके लिए, आपके कार्य के लिए बाधक नहीं है। जैसे यात्री अपना रास्ता खोजता चला जाता है, आप भी आगे बढ़ते जाओ तो रास्ता दिखाई देता जाएगा। जैसे-जैसे आगे बढ़ते जाएंगे, सीखते जाएंगे आपकी क्षमता बढ़ती जाएगी। व्यक्ति में समस्या से पार जाने की कला स्वतः आती है। सीखने से आप बड़े होते हैं, जीवन में संतुलन आता है।

जिस व्यक्ति का मस्तिष्क सन्तुलित हो वह स्वयं पर नियंत्रण लगा लेता है, ऐसा व्यक्ति दुःख की घडि़यों में भी घबराता नहीं। विपरीत समय में भी दिल पर पत्थर रखकर आगे बढ़ने के बारे में विचार कर सकता है, विचार ही ज्ञान है। ज्ञान जब होश बनता है, उस स्थिति में विचार ही काम करते हैं। विचार आपको करना है कि जीवन क्या है, मैं कौन हूं, मेरी शक्ति क्या है?

स्वयं से बार-बार प्रश्न करो मैं कौन हूं? मेरी शक्ति क्या है? क्या शक्ति लेकर दुनिया में आया हूं? बन्द मुठ्ठी में हमारा भाग्य है, शक्ति है, हौसला है, हिम्मत है। जिन्दगी की यात्रा में विवेक का सहारा ही काम करेगा। यह यात्रा पंछी की उड़ान की तरह है, आसमान में कोई पगडंडी नहीं होती, हर पंछी अपने विवेक से उड़ता है।

अपनी महिमा को जानो, अपनी कद्र करना सीखो। अपनी तस्वीर खुद ही सजाओ, कोई दूसरा आपको संवारेगा ऐसा नहीं। स्वयं को स्वयं प्रशिक्षित करो, अपने व्यक्तित्व का निर्माण करो। तुम परमात्मा के हस्ताक्षर हो, तुम्हारे जैसा परमात्मा ने किसी अन्य को नहीं बनाया। अपने पर मान करो, अपने होने का आनन्द लो।
साभारः विश्व जागृति मिशन

श्री सुंधाशु जी महाराज जीवन परिचय

सुधांशु जी महाराज का जन्म 2 मई 1955 को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में हुआ। इन्होंने गायत्री मंत्र द्वारा अज्ञानता दूर करने की विधि को जाना। बाल्यावस्था में ही इन्होंने मंत्र और श्लोकों का अच्छा ज्ञान अर्जित कर लिया था। 24 मार्च 1991 को रामनवमी के दिन इन्होंने दिल्ली में विश्व जागृति मिशन की स्थापना की।

देश-विदेश में इसकी कुल 80 शाखाएं हैं। इस मिशन के द्वारा सुधांशु जी महाराज भारत ही नहीं विदेशों में भी अध्यात्म और जनकल्याण का संदेश प्रचारित कर रहे हैं। इनका मिशन निर्धनों और कमज़ोर व्यक्तियों की सहायता करता है।

दिल्ली स्थित इनके आनन्दधम आश्रम में अस्पताल मौजूद हैं जहां गरीब व्यक्तियों को मुफ्त चिकित्सा सेवा उपलब्ध करायी जाती है। अन्य आश्रमों में भी बुजुर्गों एवं गरीबों के लिए विशेष सुविधाओं की व्यवस्था की गयी है। समय-समय पर विश्व जागृति मिशन के द्वारा सुधांशु जी महाराज देश-दुनिया में पीड़ित लोगों की सेवाओं में भी योगदान देते हैं।

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