भोपाल- मध्यप्रदेश में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की शुरुआत होते ही स्कूलों की पढ़ाई गड़बड़ा गई है। 4 नवंबर से शुरू हुए इस सर्वे में राज्यभर के करीब 65 हजार बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी जुटा रहे हैं। इनमें 15 हजार से ज्यादा शिक्षक शामिल हैं। कई ऐसे हैं जो सिंगल टीचर स्कूल चला रहे हैं और अब पढ़ाई के साथ-साथ सर्वे की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर है।
इस पूरी प्रक्रिया का असर सीधे पढ़ाई पर पड़ रहा है। 12वीं बोर्ड की परीक्षा 7 फरवरी से शुरू होनी है और शिक्षकों की BLO ड्यूटी भी उसी दिन तक चलेगी। यानी तैयारी के तीन अहम महीने शिक्षक स्कूल से बाहर रहेंगे। छमाही परीक्षा के दौरान भी गाइडेंस देने वाले टीचर नहीं हैं। सिलेबस पिछड़ रहा है खासतौर पर गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों में। प्रदेश के करीब छह हजार स्कूल ऐसे हैं जो एक या दो शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं। इनमें से आधे भी BLO बने तो पढ़ाई पूरी तरह ठप हो जाएगी।
वहीं, स्कूल शिक्षा विभाग के अफसरों ने जिम्मेदारी चुनाव आयोग पर डाल दी। उनका कहना है कि यह निर्वाचन से जुड़ा मामला है। इसलिए जवाब आयोग ही देगा। जानकारी के मुताबिक, डीपीआई कमिश्नर शिल्पा गुप्ता ने आयोग को पत्र लिखकर हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी के शिक्षकों को ड्यूटी से मुक्त रखने की सिफारिश की थी। लेकिन उसके बाद भी आदेश जारी कर दिए गए।
अब हालात ये हैं कि एक तरफ टीचर सर्वे कर रहे हैं और दूसरी तरफ स्कूलों की क्लासें खाली पड़ी हैं। शिक्षक कहते हैं, “हमसे हर सरकारी काम करवाया जाता है। साथ ही पढ़ाई बिगड़ने की जिम्मेदारी भी हम पर ही डाल दी जाती है।” चुनाव आयोग के इस आदेश से शिक्षा व्यवस्था को एक बार फिर झटका लगा है।
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