







अनिल सिंह(भोपाल से)—साधू का जीवन देश और समाज के लिए होता है,जिस धरती पर जनम हुआ उसका कर्ज,समाज के लिए उसका फर्ज यह निभाना ही होता है।इस परिपेक्ष्य में छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में स्थित शक्ति पीठ सोगड़ा आश्रम के पीठाधीश्वर औघड़ गुरुपद संभव राम जी ने इस स्थान पर चाय की खेती का परीक्षण करवाया और सफलता पूर्वक चाय का उत्पादन आज हो रहा है। इस कार्य के पीछे यह उद्देश्य छिपा था की इस वनवासी क्षेत्र में कृषि उत्पादन चाय के रूप में हो और यहाँ के लोगों को यहीं रोजगार प्राप्त हो वे अपने जीवन को आर्थिक रूप से मजबूत कर सकें ,पलायन न हो एवं ख़ुशी,आत्मनिर्भरता एवं आर्थिक सक्षमता का जीवन इन्हें जीने को मिले। दार्जिलिंग से यहाँ tv 9,tv 25,tv 26 और teenali 17 किस्म के पौधे लाये गए एवं जमीन को रोपण योग्य बना इन्हें रोपा गया,इसका रोपण सन 2010 में किया गया आज पिछले 2 वर्षो से चाय का उत्पादन शुरू हो गया है। चाय को तैयार करने हेतु”अघोर चाय प्रसंस्करण केंद्र” की स्थापना की गई,यहाँ चाय को प्रोसेस कर पैकिंग किया जाता है।शुरुआत में पौधे बाहर से मंगवाये गए अब “अघोर चाय अनुसंधान एवं विकास संवर्धन प्रायोगिक रोपणी” की स्थापना कर यहीं पौधे तैयार किये जाते है। उल्लेखनीय यह रहा की यहाँ का अधिकांश श्रम कार्य स्वयंसेवकों ने किया कुछ कार्य में ही मशीन या मजदूरों का उपयोग किया गया।आज चाय उत्पादन के नक़्शे पर जशपुर आ गया है और जिस कार्य को इतनी बड़ी सरकारी मशीनरी और साधन नहीं कर पाए एक फक्कड़ साधू ने वह कर दिखाया,यहाँ की चाय गुणवत्ता में अन्य जगहों की चाय से उत्तम है यह परीक्षणों के बात ज्ञात हुआ है। ग्रीन चाय के प्रयोग से कैंसर रोगियों को भी राहत मिली है और उनका उपचार जारी है।
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