कर्नाटक: शिवकुमार सरकार में 25 दिन में ही मंत्री का इस्तीफा

बेंगलुरु-कर्नाटक के मंत्री बी. नागेंद्र ने शुक्रवार को कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया. बेंगलुरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस्तीफे का ऐलान करते समय वह भावुक हो गए और रो पड़े. नागेंद्र पर कथित 89 करोड़ रुपये के वाल्मीकि निगम घोटाले को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा था. उन्होंने कहा कि सरकार को और शर्मिंदगी से बचाने के लिए उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया है. नागेंद्र ने यह भी दावा किया कि उन्हें दलित होने के कारण निशाना बनाया जा रहा है. वह बेल्लारी ग्रामीण विधानसभा सीट से विधायक हैं और कर्नाटक की राजनीति में प्रमुख आदिवासी नेताओं में गिने जाते हैं.

बी. नागेंद्र को इससे पहले 27 मई 2023 को सिद्धारमैया सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया था. वह 31 मई 2024 तक मंत्री रहे. महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से जुड़े कथित घोटाले में उनका नाम सामने आने के बाद उन्होंने जून 2024 में मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. बाद में अदालत से जमानत मिलने के बाद उन्हें 3 अगस्त 2026 को दोबारा कैबिनेट में शामिल किया गया. इस बार उन्हें योजना एवं सांख्यिकी मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई थी. हालांकि, विपक्ष के लगातार विरोध और घोटाले से जुड़े आरोपों के बीच उन्हें दोबारा पद छोड़ना पड़ा.बी. नागेंद्र अपने दूसरे कार्यकाल में केवल 24 दिन तक मंत्री रह पाए. उन्होंने 3 अगस्त 2026 को मंत्री पद की शपथ ली थी और 28 अगस्त को इस्तीफा दे दिया. वाल्मीकि निगम से जुड़े कथित 89 करोड़ रुपये के घोटाले में विपक्ष ने उन पर लगातार निशाना साधा. नागेंद्र ने अपने इस्तीफे के दौरान कहा कि वह सरकार पर किसी तरह का अतिरिक्त दबाव नहीं चाहते हैं. उनके इस्तीफे के बाद कैबिनेट में दो पद खाली हो गए हैं. ऐसी चर्चा है कि इन पदों पर महिला विधायकों को मौका दिया जा सकता है.

बी. नागेंद्र बेल्लारी और कुडलिगी विधानसभा सीटों से कुल चार बार विधायक चुने जा चुके हैं. उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बीजेपी से की थी. 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले वह कांग्रेस में शामिल हो गए. 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी के बी. श्रीरामुलु को हराकर बेल्लारी ग्रामीण सीट से जीत दर्ज की थी. नागेंद्र वीरशैव कॉलेज, बेल्लारी से बी.कॉम की पढ़ाई कर चुके हैं. वह एसटी वाल्मीकि नायक समुदाय से आते हैं. राजनीति में आने से पहले और उसके दौरान उनका नाम बेल्लारी के खनन क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ भी जुड़ता रहा है.

महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला 2024 में सामने आया था. इस मामले में सरकारी धन के गलत इस्तेमाल और बड़ी रकम के लेनदेन को लेकर जांच हुई. इसी मामले में बी. नागेंद्र को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था. बाद में जमानत मिलने के बाद उन्हें दोबारा कैबिनेट में शामिल किया गया. अब विपक्ष के दबाव के बीच उनके इस्तीफे से कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर वाल्मीकि निगम घोटाला चर्चा में आ गया है.

 

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