नई दिल्ली-पश्चिम बंगाल SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव नतीजों पर असर से जुड़े दावों के बीच बड़ा सवाल उठाया है। कोर्ट ने पूछा कि अगर हटाए गए वोटरों की संख्या जीत के अंतर से ज्यादा हो, तो क्या नए चुनाव कराने का आदेश दिया जा सकता है।
पश्चिम बंगाल के SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम सवाल उठाया। कोर्ट ने पूछा कि क्या न्यायपालिका नए चुनाव कराने का आदेश दे सकती है? खासकर तब, जब कई सीटों पर हटाए गए वोटरों की संख्या जीत के अंतर से ज्यादा होने का दावा किया जा रहा है।
याचिकाकर्ता ने बताया कि AC-145 में जीत का अंतर सिर्फ 401 वोट था, जबकि 8,785 वोटर हटाए गए। एक अन्य सीट पर हार का अंतर 316 वोट था, जबकि वहां भी बड़ी संख्या में वोटर हटाए गए। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाने से चुनाव नतीजे प्रभावित हुए और हजारों असली नागरिक वोट देने के अधिकार से वंचित हुए।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा कि क्या प्रभावित उम्मीदवारों ने इन 31 सीटों पर विजेता उम्मीदवारों को चुनौती देने के लिए औपचारिक चुनाव याचिकाएं दायर की हैं। जवाब में बताया गया कि कुछ सीटों पर चुनाव याचिकाएं दायर हुई हैं, लेकिन सभी पर नहीं।
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि यह देखना जरूरी है कि हटाए गए कितने लोगों ने अपील की। कोर्ट ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर 100 नाम हटे, जीत का अंतर 50 रहा और 60-70 लोगों ने अपील की, तो मामला ठोस और अहम बन जाता है। वहीं, बिना अपील नाम हटना स्वीकार करने वालों के आधार पर नतीजे को चुनौती देना सिर्फ सैद्धांतिक रह जाता है।
बेंच ने साफ किया कि जांच केवल इन 31 सीटों तक सीमित नहीं रहेगी। सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल में अपीलीय ट्रिब्यूनल के सामने लंबित सभी मामलों की जांच करना चाहता है, ताकि उनका समय पर समाधान हो सके।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच TMC सदस्य की ओर से सीनियर एडवोकेट कल्याण बंदोपाध्याय की अर्जी पर सुनवाई कर रही थी। बंदोपाध्याय ने 31 विधानसभा क्षेत्रों का ब्योरा दिया। इनमें BJP उम्मीदवारों की जीत का अंतर SIR के दौरान हटाए गए वोटरों की संख्या से कम था।
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